Jamshedpur News: झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले मानगो नगर निगम के मेयर पद को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. डॉक्टर संतोष गुप्ता और उनकी पत्नी रूबी जायसवाल की भूमिका इस चुनाव में चर्चा का केंद्र बन गई है. मेयर पद महिला आरक्षित होने के कारण चुनावी मैदान में रूबी जायसवाल उतरने जा रही हैं, जबकि उनके पीछे डॉक्टर संतोष गुप्ता की लंबे समय की जनसेवा को बड़ा आधार माना जा रहा है.
डॉक्टर संतोष गुप्ता की पहचान, सेवा से बना जनाधार
डॉक्टर संतोष गुप्ता मानगो क्षेत्र में वर्षों से चिकित्सा और सामाजिक सेवा से जुड़े रहे हैं. कम खर्च में इलाज और कई मामलों में मुफ्त उपचार के कारण गरीब तबके में उनकी अलग पहचान बनी है. आजाद बस्ती समेत कई इलाकों में उनकी स्वीकार्यता बताई जाती है. खासकर मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी सेवा को लेकर भरोसा और सम्मान देखा जाता है.
रूबी जायसवाल की दावेदारी, सेवा को आगे बढ़ाने का दावा
महिला आरक्षण के चलते जब डॉक्टर संतोष गुप्ता स्वयं मेयर पद पर नहीं उतर सके, तब परिवार की ओर से यह फैसला लिया गया कि रूबी जायसवाल चुनाव लड़ेंगी. रूबी जायसवाल की छवि भी उन्हीं सामाजिक कार्यों से जुड़ी मानी जा रही है, जो संतोष गुप्ता वर्षों से करते आए हैं. परिवार का कहना है कि चेहरा बदला है, लेकिन जनसेवा की दिशा और उद्देश्य वही रहेंगे.
सियासी मुकाबले में बढ़ी चुनौती
रूबी जायसवाल की एंट्री से पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता के लिए मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संतोष गुप्ता की सकारात्मक छवि के कारण एक बड़े वोट बैंक में सेंध लग सकती है. यह चुनाव अब केवल राजनीतिक विरासत का नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए काम की तुलना का भी बनता जा रहा है.
रूबी जायसवाल को जदयू का समर्थन
सूत्रों के अनुसार रूबी जायसवाल को जदयू का समर्थन मिल सकता है. हालांकि इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. फिर भी इस संभावना ने चुनावी गणित को और दिलचस्प बना दिया है. स्थानीय समीकरण और समुदाय आधारित समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
मानगो की राजनीति में सेवा और सत्ता की बहस
इस चुनाव में डॉक्टर संतोष गुप्ता की जनसेवा और रूबी जायसवाल की राजनीतिक दावेदारी एक साथ सामने है. मतदाताओं के सामने सवाल यह है कि वे सेवा से बने भरोसे को चुनते हैं या पारंपरिक राजनीतिक ताकत को.
मानगो मेयर चुनाव में संतोष गुप्ता और रूबी जायसवाल की जोड़ी सेवा और राजनीति के संतुलन का प्रतीक बनकर उभरी है. यह चुनाव तय करेगा कि स्थानीय निकायों में जमीनी काम और सामाजिक जुड़ाव कितना असर डालता है. साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि महिला आरक्षण के दौर में परिवार आधारित राजनीति को मतदाता किस नजर से देखते हैं.