Jamshedpur Big News: जमशेदपुर के बिष्टुपुर CH एरिया से लापता युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं. पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि यह वारदात अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई. हनी ट्रैप को इस साजिश की पहली कड़ी माना जा रहा है, जिसके जरिए कैरव को घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया गया.
हनी ट्रैप के जरिए घर से निकले कैरव
पुलिस जांच के अनुसार, अपहरण से पहले कैरव गांधी को एक युवती के जरिए हनी ट्रैप में फंसाया गया. तय योजना के तहत कैरव तय समय पर घर से निकले. इसी जल्दबाजी में वे बैंक में जमा करने वाले चेक भी घर पर ही छोड़ गए. घर से कुछ दूरी पर ही पहले से तैयार अपराधियों ने उन्हें अगवा कर लिया.
पुलिस लिखे वाहन से दिया वारदात को अंजाम
बताया जा रहा है कि अपहरणकर्ताओं ने पुलिस लिखे वाहन का इस्तेमाल किया ताकि किसी को शक न हो. यह तरीका पहले से सोची गई साजिश की ओर इशारा करता है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कैरव की दिनचर्या, रहन-सहन और कमजोरियों की जानकारी आखिर किसे थी.
दोस्तों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान पुलिस की नजर अब कैरव के करीबी दोस्तों पर भी है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या अंदर की जानकारी किसी परिचित ने दी थी. इसी कड़ी में उस व्यक्ति की तलाश भी हो रही है, जिसे कैरव की निजी जानकारी थी.
गिरोह के पुराने पैटर्न पर पुलिस की नजर
जानकारी के अनुसार हाजीपुर के चंदन सोनार और अरविंद गिरोह पर भी शक जताया जा रहा है. बताया जाता है कि यह गिरोह पहले भी युवती के जरिए हनी ट्रैप में फंसाकर अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम देता रहा है. पुलिस अन्य ऐसे गिरोहों की भी पहचान कर रही है जो इसी ट्रेंड पर काम करते हैं.
तीन राज्यों में तलाशी अभियान
कैरव गांधी और अपहरणकर्ताओं की तलाश के लिए पुलिस ने दायरा बढ़ा दिया है. बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल और मुंबई में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान में जमशेदपुर और सरायकेला पुलिस के साथ साथ सीआइडी और एटीएस की टीमें भी लगी हैं. टेक्निकल सेल की मदद से कॉल और डिजिटल सुराग खंगाले जा रहे हैं.
इंडोनेशिया कोड से आए कॉल भी जांच में
कैरव के पिता देवांग गांधी और चाचा प्रशांत गांधी को इंडोनेशिया कोड वाले नंबर से 17 बार व्हाट्सएप कॉल आने की बात सामने आई है. पुलिस इस कॉल के स्रोत और उद्देश्य का पता लगाने में जुटी है. कैरव गांधी के अपहरण को नौ दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक पुलिस उन्हें बरामद नहीं कर सकी है. बेटे की सकुशल वापसी को लेकर परिवार चिंतित है. हालांकि जब परिजन इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे है.
इस मामले में सामने आए तथ्यों से साफ है कि अपहरण केवल आपराधिक वारदात नहीं बल्कि पूरी तरह से प्लान की गई साजिश थी. हनी ट्रैप का इस्तेमाल और पुलिस लिखे वाहन का प्रयोग यह दिखाता है कि अपराधियों ने भरोसे और सिस्टम दोनों का फायदा उठाया. दोस्तों और करीबी दायरे की जांच से यह मामला और संवेदनशील हो गया है. आने वाले दिनों में टेक्निकल साक्ष्य और अंतरराज्यीय तलाशी अभियान इस केस की दिशा तय करेंगे.