Jamshedpur: टेल्को स्थित विद्या भारती चिन्मय विद्यालय में आज शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लैंगिक समावेशिता विषय पर एक विशेष व्यावसायिक विकास सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के हब एवं स्पोक विद्यालय मॉडल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में समानता और संवेदनशीलता के माहौल को बढ़ावा देना था। विद्यालय के सचिव श्री विष्णु चंद्र दीक्षित के मार्गदर्शन एवं प्राचार्या श्रीमती मीना विल्खू के कुशल निर्देशन में आयोजित इस सत्र ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने का प्रयास किया।
10 विद्यालयों के शिक्षकों का महाकुंभ
इस कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें केवल मेजबान विद्यालय ही नहीं, बल्कि जमशेदपुर के विभिन्न 10 सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया। विद्या भारती चिन्मय विद्यालय के संपूर्ण शिक्षक दल के साथ मिलकर इन अतिथियोंरूढ़ियों ने विचार-विमर्श और सामूहिक अधिगम के माध्यम से जेंडर संबंधी को तोड़ने पर चर्चा की।
रूढ़ियों से परे संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा
सत्र का औपचारिक शुभारंभ करते हुए प्राचार्या मीना विल्खू ने अपने संबोधन में कहा, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी का सम्मान सुनिश्चित करना है। विद्यालयों की प्रगतिशीलता इसी में है कि वे समावेशी बनें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षकों को जेंडर-रेस्पॉन्सिव पेडागॉजी अपनानी चाहिए ताकि कक्षा में हर बच्चे को समान अवसर और गरिमा मिल सके।
व्यावहारिक गतिविधियों से सीखी बारीकियां
प्रशिक्षण सत्र का संचालन मुख्य प्रशिक्षिका सुलग्ना ऐच एवं मीता मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने अत्यंत सहज और प्रभावी ढंग से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला कक्षा में ऐसी भाषा का प्रयोग जो किसी विशेष लिंग के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हो।दैनिक शिक्षण में आने वाली चुनौतियों को उदाहरणों के माध्यम से समझाना। खेल के मैदान से लेकर प्रयोगशाला तक हर जगह भेदभाव रहित वातावरण का निर्माण।
प्रेरणास्पद रहा सत्र
सत्र के समापन पर सहभागी शिक्षकों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक बताया। शिक्षकों का मानना था कि ऐसे सत्र न केवल उन्हें पेशेवर रूप से समृद्ध करते हैं, बल्कि एक बेहतर समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को भी स्पष्ट करते हैं। अंत में, यह संदेश साझा किया गया कि समावेशिता ही वह आधार है जो भविष्य की शिक्षा को समर्थ और मानवीय बनाएगी।