National News: गणतंत्र दिवस से ठीक पहले केंद्र सरकार ने देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है. न्यूज एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस बार सम्मान की सूची में ऐसे लोगों को जगह दी गई है, जिन्होंने बिना शोर किए समाज के लिए बड़ा काम किया. सरकार की ओर से आधिकारिक सूची शाम को जारी की जानी है, लेकिन उससे पहले कई नाम सामने आ चुके हैं.
साहित्य शिक्षा से लेकर पर्यावरण तक योगदान
सूत्रों के अनुसार कर्नाटक के अंके गौड़ा को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा. वहीं गुजरात के मीर हाजीभाई कासमभाई को कला के क्षेत्र में पद्म श्री देने की तैयारी है. मध्य प्रदेश के मोहन नागर का नाम पर्यावरणविद के तौर पर सामने आया है, जिन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए चुना गया है.
अनसंग हीरोज पर सरकार का फोकस
इस बार पद्म श्री पुरस्कारों में अनसंग हीरोज श्रेणी खास चर्चा में है. सूत्र बताते हैं कि करीब 45 ऐसे लोगों को पद्म श्री दिया जा रहा है, जो अब तक राष्ट्रीय मंच से दूर रहे. इस सूची में मध्य प्रदेश से भगवानदास रैकवार, जम्मू कश्मीर से बृज लाल भट्ट, छत्तीसगढ़ से बुदरी थाटी, ओडिशा से चरण हेम्ब्रम और गुजरात से धार्मिकलाल चुन्नीलाल पांड्या के नाम शामिल हैं.
यूपी से चिरंजी लाल यादव समेत कई राज्यों के नाम
पद्म पुरस्कार पाने वालों में उत्तर प्रदेश से चिरंजी लाल यादव का नाम सामने आया है. महाराष्ट्र से डॉ आर्मिडा फर्नांडिस और भिकल्या लाडक्या धिंडा, राजस्थान से गफरुद्दीन मेवाती, जम्मू कश्मीर से डॉ पद्मा गुरमेट, तमिलनाडु से डॉ पुन्नियामूर्ति नटेशन और तेलंगाना से डॉ कुमारस्वामी थंगराज भी सूची में शामिल बताए जा रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक इस साल की सूची में पिछड़े वर्ग, दलित समुदाय, आदिवासी जनजातियों और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले लोगों को खास तरजीह दी गई है. इन लोगों ने दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों, दलितों और आदिवासियों के लिए जीवन भर काम किया है. स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में इनके योगदान को आधार बनाया गया है.
खामोशी से देश सेवा करने वालों का सम्मान
सूची में ऐसे डॉक्टर भी शामिल हैं जो हीमोफीलिया जैसी स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझते लोगों के लिए काम कर रहे हैं. वहीं भारत का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने वाले नियोनेटोलॉजिस्ट का नाम भी सामने आया है. सीमावर्ती राज्यों में स्वदेशी विरासत को बचाने, आदिवासी भाषाओं और पारंपरिक मार्शल आर्ट को बढ़ावा देने वाले लोग भी इस सम्मान का हिस्सा हैं.
इस बार के पद्म पुरस्कार यह संकेत देते हैं कि सरकार का फोकस बड़े नामों से हटकर जमीनी काम करने वालों पर गया है. गुमनाम रहकर समाज को दिशा देने वाले लोगों को मंच देना न सिर्फ सम्मान की परिभाषा बदलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि असली राष्ट्र निर्माण चुपचाप होने वाले कामों से होता है.