National News: दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड इस बार एक खास वजह से यादगार बन गई. जम्मू कश्मीर की 26 साल की सिमरन बाला ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की पुरुष सदस्यीय टुकड़ी का नेतृत्व किया. यह पहला मौका था जब किसी महिला अधिकारी ने 140 से अधिक पुरुष जवानों की कमान संभाली और परेड का नेतृत्व किया. इस ऐतिहासिक पल के बाद सिमरन बाला का नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया.
परेड के बाद बढ़ी लोगों की दिलचस्पी
कर्तव्य पथ पर कदमताल के बाद सिमरन बाला को लेकर लोगों की जिज्ञासा अचानक बढ़ गई. सोशल मीडिया और इंटरनेट पर लोग यह जानना चाहते हैं कि यह महिला अधिकारी कौन हैं और उनका सफर कहां से शुरू हुआ. गणतंत्र दिवस के मंच से सामने आई यह तस्वीर देश में महिलाओं की बदलती भूमिका की कहानी कहती नजर आई.
राजौरी से सीआरपीएफ तक का सफर
सिमरन बाला जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले की रहने वाली हैं. वह इस जिले से सीआरपीएफ में अधिकारी बनने वाली पहली महिला हैं. सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जिसमें करीब 3.25 लाख कर्मी कार्यरत हैं. यह बल नक्सल विरोधी अभियानों, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और उत्तर पूर्व में उग्रवाद से निपटने की अहम जिम्मेदारी संभालता है.
शिक्षा और यूपीएससी में सफलता
सिमरन बाला ने जम्मू के गांधी नगर स्थित सरकारी महिला कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 2023 में उन्होंने यूपीएससी द्वारा आयोजित सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा पास की और सीआरपीएफ में बतौर अधिकारी चयनित हुईं. उनकी यह सफलता राजौरी जैसे सीमावर्ती जिले की कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है.
बस्तरिया बटालियन में पहली तैनाती
सीआरपीएफ में कमीशन मिलने के बाद सिमरन बाला की पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ की बस्तरिया बटालियन में हुई. यहां उन्हें नक्सल विरोधी अभियानों में काम करने का अनुभव मिला. प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सीआरपीएफ अकादमी गुरुग्राम में उत्कृष्ट प्रशिक्षण और पब्लिक स्पीकिंग के लिए पुरस्कार भी हासिल किया.
परेड में महिला भागीदारी ने बढ़ाया आकर्षण
इस साल गणतंत्र दिवस परेड में महिला जवानों की भागीदारी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया. सीआरपीएफ और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त डेयर डेविल्स टीम ने बाइक स्टंट के जरिए लोगों का ध्यान खींचा. इन बलों की महिला जवान पहले भी गणतंत्र दिवस पर अपने साहस और कौशल का प्रदर्शन कर चुकी हैं.
सिमरन बाला का कर्तव्य पथ पर पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करना सिर्फ एक परेड का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह सुरक्षा बलों में बदलते सामाजिक ढांचे का संकेत है. यह घटना दिखाती है कि अब नेतृत्व क्षमता को लिंग से नहीं बल्कि काबिलियत से आंका जा रहा है. आने वाले समय में सिमरन बाला जैसी अधिकारी देश की हजारों युवतियों के लिए नई राह खोल सकती हैं.