Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में एक बार फिर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। अस्पताल परिसर में हुई मारपीट की एक ताज़ा घटना ने न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वहां कार्यरत नर्सिंग स्टाफ के बीच गहरा रोष भी पैदा कर दिया है।
नर्स के साथ की गाली-गलौज
मिली जानकारी के अनुसार, मेडिसिन विभाग में इलाज के लिए भर्ती मरीज हबीब अंसारी के परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात नर्स अनुपम के साथ पहले गाली-गलौज की और फिर उनके साथ हाथापाई की। आरोप है कि हमलावरों ने खुद को “मंत्री का आदमी” बताते हुए नर्स को धमकाया और खुलेआम शारीरिक हमला किया। इस घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
विरोध स्वरूप हड़ताल की घोषणा
घटना से आहत और आक्रोशित नर्सिंग स्टाफ ने विरोध स्वरूप हड़ताल की घोषणा कर दी है। बड़ी संख्या में नर्सें ट्रॉमा सेंटर के बाहर एकत्र होकर RIMS प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। नर्सिंग स्टाफ की साफ मांग है कि जब तक आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील और ज़रूरी संस्थान में अगर स्वास्थ्यकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो वे पूरी निष्ठा के साथ मरीजों की सेवा कैसे कर सकते हैं।
प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं
पीड़ित नर्स अनुपम ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि RIMS में मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जाता है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल लगातार टूट रहा है और भय का माहौल बनता जा रहा है।
ओपीडी पूरी तरह प्रभावित
हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की सेवाओं पर पड़ रहा है। ओपीडी से लेकर इनडोर सेवाएं तक बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनमें भी नाराज़गी देखी जा रही है। कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाने की स्थिति बन गई है।
किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं
हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक RIMS प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही किसी ठोस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक स्वास्थ्यकर्मी असुरक्षित माहौल में अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर रहेंगे, और कब प्रशासन उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।