अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण करने वालों को राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण नियमों के अनुरूप किया गया है। अदालत ने कहा कि अवैध निर्माण के कारण किसी को पानी नहीं मिल रहा तो किसी को सूर्य की रोशनी तक से वंचित होना पड़ रहा है, जिससे ईमानदारी से जीवन जीने वाले और कानून का पालन करने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।
9 मार्च तक ध्वस्तीकरण, शपथ पत्र अनिवार्य
हाईकोर्ट ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को निर्देश दिया है कि वह 9 मार्च तक 24 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई भी 9 मार्च को ही होगी। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई अवैध निर्माणकर्ता कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय
इस मामले में राकेश कुमार झा की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसकी पैरवी अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने की। पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने JNAC क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को एक माह के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह आदेश के अनुपालन के लिए JNAC को हरसंभव सहयोग प्रदान करे। अदालत ने नगर विकास सचिव, उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को सहयोग में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
अवैध निर्माण में JNAC की सांठगांठ पर सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने दोहराया कि पूर्व आदेश अधिवक्ताओं की कमेटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों के पक्ष सुनने के बाद ही पारित किया गया था। वकीलों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प है। अदालत ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की सांठगांठ रही है।
अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट में गंभीर खुलासे
जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय अधिवक्ताओं की समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भवन उपनियमों का पालन न होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी का अभाव इस समस्या के प्रमुख कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अब हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।