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  • 2026-01-30

Jharkhand News: निकाय चुनाव में तीन चरण में होगी प्रत्याशियों की जांच, नामांकन से नतीजे तक खर्च पर पैनी नजर

Jharkhand News: नगर निकाय चुनाव में इस बार प्रत्याशियों के खर्च पर आयोग की सीधी नजर रहेगी. राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही अधिकतम खर्च सीमा तय कर दी है और अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी उम्मीदवार तय सीमा से अधिक राशि खर्च न कर सके. इसी उद्देश्य से सभी निर्वाचन क्षेत्रों में व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है, जिन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनाव प्रक्रिया के हर चरण में खर्च की निगरानी करेंगे.

तीन दौर में होगी निगरानी प्रक्रिया
आयोग के निर्देश के अनुसार व्यय पर्यवेक्षक अपने निर्धारित निर्वाचन क्षेत्रों का तीन बार दौरा करेंगे. इन दौरों के माध्यम से प्रत्याशियों के खर्च का लेखा जोखा देखा जाएगा और यह परखा जाएगा कि चुनाव प्रचार और अन्य गतिविधियों में निर्धारित सीमा का पालन हो रहा है या नहीं. यह प्रक्रिया नामांकन से लेकर मतदान और परिणाम तक चलेगी.

पहले चरण में सभी दलों से होगी मुलाकात
निर्वाचन की अधिसूचना 27 जनवरी को जारी होने के बाद अगले ही दिन व्यय पर्यवेक्षक अपने अपने क्षेत्रों में पहुंच गए थे. पहले दौरे के दौरान उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे चुनाव खर्च अनुश्रवण में लगे सभी दलों और टीमों से मिलें. इसके साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दी गई सूची में से सहायक व्यय पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी करेंगे.

असंतोष होने पर बदले जा सकते हैं सहायक पर्यवेक्षक
यदि व्यय पर्यवेक्षक किसी सहायक के काम से संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे उपायुक्त से दूसरी सूची मांग सकते हैं और उसमें से उपयुक्त व्यक्ति को जिम्मेदारी दे सकते हैं. इससे निगरानी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनाए रखने का प्रयास किया गया है.

प्रशासनिक एजेंसियों से समन्वय अनिवार्य
व्यय पर्यवेक्षक जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आयकर विभाग, राज्य उत्पाद विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे. वे मतदान की तैयारी से संबंधित प्रतिवेदन सौंपने के बाद ही निर्वाचन क्षेत्र छोड़ेंगे. पहले चरण में वे लगभग तीन दिनों तक क्षेत्र में रहेंगे.

चुनाव में खर्च की निगरानी को लेकर इस बार आयोग का रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त दिखाई दे रहा है. तीन चरणों में की जाने वाली जांच से यह संकेत मिलता है कि हर स्तर पर जवाबदेही तय करने की कोशिश की जा रही है. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि चुनाव प्रक्रिया में धन के अनुचित प्रभाव को रोकने में भी मदद मिल सकती है.
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