श्रीकृष्ण और गुरुदेव के आह्वान से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का केंद्रीय भाव अपने भीतर श्रीकृष्ण और गुरुदेव का आह्वान करें रखा गया था। आयोजन का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण के साथ हुआ। इस दौरान चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की गौरवशाली और प्रेरणादायी यात्रा को याद किया गया, जिसने विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया है।
सामूहिक पाठ से गुंजायमान हुआ परिसर
मुख्य कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधकों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भगवद्गीता के अध्याय 12 (भक्तियोग) और अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग) का सस्वर पाठ किया। गुरु स्तोत्रम्, गीता पंचामृत और हृदयस्पर्शी भजन-कीर्तन ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। सामूहिक स्वर की शक्ति ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर चिन्मय मिशन के अध्यक्ष श्री बी. सुरेन्द्रनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की हर चुनौती का समाधान है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, अजितेश मोंगा प्लांट मैनेजर और डायरेक्टर, टाटा कमिन्स संजय सिंहा अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति मानस मिश्रा पूर्व अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति विष्णु चंद्र दीक्षित सचिव, विद्यालय प्रबंध समिति मीना विल्खू प्राचार्या इसके अलावा कई पूर्व शिक्षक, अभिभावक और चिन्मय मिशन के गणमान्य सदस्य इस पावन बेला के साक्षी बने।
संस्कार और अध्यात्म का संगम
प्राचार्या मीना विल्खू ने आयोजन की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि गीता जीवन को दिशा देने वाली दिव्य मार्गदर्शिका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना, सेवा भाव और नैतिक संस्कारों का बीजारोपण होता है।
कार्यक्रम का समापन चिन्मय आरती और शांति पाठ के साथ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को जमशेदपुर के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज कर दिया।