Jharkhand News: झारखंड में विदेश जाने की चाह अब सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं रह गई है. राज्य में पासपोर्ट बनवाने वाली महिलाओं की संख्या हर साल नई ऊंचाई पर पहुंच रही है. रांची क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से जारी आंकड़े बताते हैं कि बीते तीन वर्षों में कुल आवेदकों में करीब 38 प्रतिशत महिलाएं रहीं. वर्ष 2025 में 1,13,384 पासपोर्ट जारी हुए, जिनमें 36 हजार से अधिक महिलाओं के थे. यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि राज्य में महिलाओं की वैश्विक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है.
पिछले तीन वर्षों में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी
वर्ष 2022 में 27,206, वर्ष 2023 में 32,015 और वर्ष 2024 में 34,782 महिलाओं के पासपोर्ट बने. हर साल यह संख्या बढ़ती चली गई. वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 36 हजार के पार पहुंच गया. कोरोना काल के बाद से पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. अब राज्य में हर साल एक लाख से अधिक पासपोर्ट जारी हो रहे हैं.
रांची पासपोर्ट कार्यालय का रिकॉर्ड प्रदर्शन
रांची क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना जुलाई 2002 में हुई थी. तब से लेकर दिसंबर 2025 तक कुल 10.97 लाख से अधिक पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा पासपोर्ट वर्ष 2025 में बने. वर्ष 2024 में 1,12,844 और वर्ष 2025 में 1,13,384 पासपोर्ट जारी हुए. पूरे राज्य में अब करीब 17 लाख पासपोर्टधारी हो चुके हैं.
जिलों की रैंकिंग में पश्चिमी सिंहभूम सबसे आगे
आंकड़ों के अनुसार पासपोर्ट बनवाने के मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिला पहले स्थान पर है. रांची दूसरे और धनबाद तीसरे नंबर पर हैं. वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक रांची क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने करीब 10.98 लाख पासपोर्ट जारी किए. कई जिलों में पुलिस वेरिफिकेशन में देरी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
पलामू से विदेश जाने का बढ़ता रुझान
राज्य के पिछड़े जिलों में गिने जाने वाले पलामू में भी पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. हर साल करीब साढ़े छह हजार लोग यहां से पासपोर्ट बनवा रहे हैं. मेदनीनगर, हुसैनाबाद, हैदरनगर और हरिहरगंज से सबसे अधिक आवेदन आ रहे हैं. नौकरी के लिए गल्फ देशों को पहली पसंद माना जा रहा है, जबकि आईटी और अन्य सेक्टर के लिए यूरोप और अमेरिका की ओर रुझान है.
जमशेदपुर में बढ़ा इंतजार, रांची में जल्दी अपॉइंटमेंट
जमशेदपुर में पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या इस समय रिकॉर्ड स्तर पर है. यहां आवेदकों को एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि रांची में 24 घंटे के भीतर अपॉइंटमेंट मिल जा रहा है. इससे दोनों शहरों के बीच सुविधा का अंतर साफ नजर आता है.
ई-पासपोर्ट से सुरक्षा और गति दोनों में सुधार
प्रदेश में ई-पासपोर्ट की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. इसकी शुरुआत एक अप्रैल 2024 को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी. यह पासपोर्ट कंबाइंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर आधारित है, जिससे डुप्लीकेसी से बचाव और डेटा सुरक्षा संभव हो रही है. रांची सहित देश के कई शहरों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है.
एप से आवेदन पर पांच दिन में पासपोर्ट
विदेश मंत्रालय के एप से आवेदन करने पर पुलिस वेरिफिकेशन में समय बच रहा है. एप के उपयोग से पासपोर्ट जारी करने की समय सीमा घटकर पांच दिन तक रह गई है. झारखंड के सात जिलों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है, जहां प्रक्रिया अन्य जिलों से तेज है.
झारखंड में पासपोर्ट के आंकड़े केवल विदेश जाने की संख्या नहीं बताते, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और आर्थिक दिशा में हो रहे बदलाव का संकेत भी हैं. महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी, पिछड़े जिलों से बढ़ता रुझान और डिजिटल सेवाओं का विस्तार यह दिखाता है कि झारखंड अब वैश्विक अवसरों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है.