Jharkhand News: चावल और धान के कारोबार से जुड़े बाबा राइस मिल ग्रुप पर आयकर विभाग की कार्रवाई अब बड़े खुलासों की ओर बढ़ती दिख रही है. बिहार और झारखंड के कई शहरों में एक साथ शुरू हुई छापेमारी में भारी नकदी, कच्चे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं. विभाग का मानना है कि यह मामला सिर्फ बेहिसाब आय तक सीमित नहीं बल्कि संगठित टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क हो सकता है.
साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा नकदी जब्त
अब तक की छानबीन में आयकर विभाग ने साढ़े 3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है. इनमें से सवा करोड़ रुपये एक दिन पहले ही बाबा राइस मिल के प्रोपराइटर योगेश साहू के ठिकाने से मिले थे. बरामद रकम के संबंध में अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है.
कच्चे कागज पर चलता था कारोबार
जांच में सामने आया है कि समूह ने बड़े पैमाने पर कच्चे कागजों पर लेन देन दर्ज कर रखा था, जिसका आधिकारिक लेखा विभाग को नहीं दिया गया था. इसी तरीके से टैक्स चोरी कर बेहिसाब संपत्ति अर्जित की गई. विभाग को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिये करोड़ों रुपये का टैक्स नुकसान हुआ है.
हवाला लेन-देन के भी संकेत
छापेमारी के दौरान आयकर टीम को हवाला के माध्यम से धन के लेन देन से जुड़े सुराग भी मिले हैं. इससे जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त कर लिए गए हैं. इस एंगल से भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
कई शहरों में फैला नेटवर्क
जहां छापेमारी चल रही है उनमें रांची के नगड़ी स्थित बाबा राइस मिल, हरमू स्थित कार्यालय, कांके रोड पर मनीष साहू का आवास, रातू रोड पर योगेश साहू का घर, जमशेदपुर के सर्किट हाउस क्षेत्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट मनोज चौधरी का आवास शामिल हैं. बिहार में गयाजी के धान कारोबारी राजेश साव और गौरीशंकर गुप्ता के आवास और गोदाम, औरंगाबाद की बाबा राइस मिल और सीता राइस मिल भी जांच के दायरे में हैं.
सहयोगी कंपनियों पर भी रेड
बाबा राइस मिल से जुड़ी बाबा एग्रो फूड, बाबा फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड और उनसे जुड़े एस मोहंती, राज कुमार लाखोटिया, संचिता जायसवाल, मनीष कुमार, राखी साहू, एकता साहू, अमित कुमार और ज्ञान प्रकाश साहू के आवास व कार्यालयों पर भी आयकर की टीम तीसरे दिन तक जांच में जुटी रही.
पांच शहरों में 500 से ज्यादा अधिकारी तैनात
यह कार्रवाई रांची, जमशेदपुर, औरंगाबाद, गयाजी और पटना में एक साथ चल रही है. इसमें आयकर विभाग के 500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगे हुए हैं. बरामद दस्तावेज और डिजिटल उपकरणों का सत्यापन भी लगातार किया जा रहा है.
लगातार बढ़ रही बरामदगी और नए खुलासों से यह मामला साधारण टैक्स जांच से कहीं बड़ा नजर आ रहा है. कच्चे दस्तावेज और हवाला के संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहा है. आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद इस घोटाले का वास्तविक आकार सामने आने की संभावना है.