Chaibasa News: रविवार को चाईबासा और चक्रधरपुर में न्याय का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जहां आम लोगों के लंबित विवाद आपसी सहमति से सुलझाए गए और अदालतों पर बोझ कम करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम के तत्वावधान में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन हुआ.
8 न्यायपीठों ने संभाली सुनवाई
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर के मार्गदर्शन में चाईबासा सिविल कोर्ट परिसर और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय में कुल आठ न्यायपीठों का गठन किया गया. इन पीठों ने प्री-लिटिगेशन और विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई की.
एक दिन में 802 मामलों का समाधान
लोक अदालत के दौरान कुल 802 मामलों का निपटारा किया गया. इन मामलों के निष्पादन से कुल 10,02,970 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो इस आयोजन की सफलता को दर्शाता है.
न्यायिक अधिकारियों की रही सक्रिय भूमिका
इस लोक अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार सिंह, जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संतोष आनंद प्रसाद, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी, न्यायिक दंडाधिकारी एंजिलिना नीलम मड़की, मंजीत कुमार साहू, पूजा पांडेय सहित चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय के अजय कुमार सिंह और कृष्णा लोहरा समेत कई न्यायिक अधिकारी और पैनल अधिवक्ता मौजूद रहे.
हर माह मिलती है सुलह का अवसर
प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी ने बताया कि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार हर माह के अंतिम रविवार को लोक अदालत का आयोजन किया जाता है, ताकि लोग अपने सुलह योग्य मामलों का त्वरित और सरल समाधान पा सकें.
लोक अदालत का यह आयोजन दिखाता है कि आपसी सहमति और संवाद के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को तेज और मानवीय बनाया जा सकता है. ऐसे मंच न केवल अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ घटाते हैं, बल्कि आम लोगों को समय और खर्च दोनों से राहत भी देते हैं.