Jharkhand News: जेपीएससी-2 परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच तेज कर दी है. इस मामले में ईडी ने ECIR दर्ज करने के बाद राज्य सरकार से सीबीआई द्वारा आरोपित 28 झारखंड पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की विस्तृत जानकारी मांगी है. मांगे गए ब्योरे में इन अधिकारियों की वर्तमान पोस्टिंग के साथ-साथ उनकी घोषित और पैतृक संपत्ति का विवरण भी शामिल है.
सीबीआई पहले ही जेपीएससी-2 घोटाले की जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है. सभी 28 अधिकारी फिलहाल जमानत पर हैं. सीबीआई ने कुल 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें जेपीएससी के 6 अधिकारी, ग्लोबल इंफॉरमेटिक्स का 1 व्यक्ति, गलत तरीके से चयनित 28 अभ्यर्थी और 25 परीक्षक शामिल थ. ईडी ने ECIR में इन सभी को अभियुक्त बनाया है.
जानकारी के अनुसार, गलत तरीके से चयनित होकर अफसर बने कई राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अब ADM रैंक तक प्रोन्नत हो चुके हैं. वहीं राज्य पुलिस सेवा के दो अधिकारी पदोन्नति पाकर IPS बन चुके हैं.
ईडी ने जिन 28 अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा मांगा है:
• राधा प्रेम किशोर – DSP
• बिनोद राम – राज्य प्रशासनिक सेवा
• हरिशंकर बड़ाइक – राज्य प्रशासनिक सेवा
• हरिहर सिंह मुंडा – डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट
• रवि कुमार कुजूर – डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट
• मुकेश कुमार महतो – DSP
• कुंदन कुमार सिंह – वित्त सेवा
• मौसमी नागेश – वित्त सेवा
• कानू राम नाग – राज्य प्रशासनिक सेवा
• प्रकाश कुमार – राज्य प्रशासनिक सेवा
• संगीता कुमारी – वित्त सेवा
• रजनीश कुमार – राज्य प्रशासनिक सेवा
• शिवेंद्र – DSP
• संतोष कुमार चौधरी – राज्य प्रशासनिक सेवा
• रोहित सिन्हा – राज्य प्रशासनिक सेवा
• शैलेश कुमार श्रीवास्तव – वित्त सेवा
• अमित कुमार – राज्य प्रशासनिक सेवा
• राहुल जी आनंद जी – राज्य प्रशासनिक सेवा
• इंद्रजीत सिंह – वित्त सेवा
• शिशिर कुमार सिंह – राज्य प्रशासनिक सेवा
• राजीव कुमार सिंह – राज्य प्रशासनिक सेवा
• राम कृष्ण कुमार – राज्य प्रशासनिक सेवा
• प्रमोद राम – राज्य प्रशासनिक सेवा
• अरविंद कुमार सिंह – DSP
• विकास कुमार पांडेय – DSP
• मनोज कुमार – राज्य प्रशासनिक सेवा
• सुदामा कुमार – वित्त सेवा
• कुमुद कुमार – सहकारिता पदाधिकारी
ईडी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इन सभी अधिकारियों की नियुक्ति, वर्तमान तैनाती और अब तक घोषित संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड मांगा है. नियमों के अनुसार, सरकारी सेवा में शामिल होते समय अधिकारियों को अपनी और पैतृक संपत्ति की जानकारी देनी होती है. इसके अलावा, राज्य सेवा के अधिकारियों को हर साल सरकार को संपत्ति का विवरण सौंपना अनिवार्य है, जबकि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी यह जानकारी केंद्र सरकार को देते हैं.
ईडी अब इन्हीं स्व-घोषित संपत्ति विवरणों के आधार पर यह जांच कर रही है कि कहीं अवैध कमाई को छुपाकर तो नहीं रखा गया. इस कार्रवाई के बाद जेपीएससी-2 घोटाले में जांच और सख्त होने की संभावना है.