Jharkhand News: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा 2023 के पहले चरण का संशोधित परिणाम जारी कर दिया है. यह निर्णय स्कूली शिक्षा विभाग के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लिया गया है. संशोधित सूची से हजारों अभ्यर्थियों के चयन की स्थिति बदल गई है, जिससे राज्यभर में चर्चा और हलचल का माहौल है.
संशोधन का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट का वह स्पष्ट निर्देश है, जिसमें कहा गया है कि जिन अभ्यर्थियों ने OBC, SC या ST श्रेणी के अंतर्गत अंक या आयु में छूट लेकर पात्रता प्राप्त की है, उन्हें अनारक्षित (जनरल) सीट पर चयन नहीं दिया जा सकता. इसी आदेश के अनुपालन में JSSC ने ऐसे सभी अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी से हटाकर उनकी मूल आरक्षित श्रेणी में समायोजित किया है.
यह संशोधित परिणाम स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य (कक्षा 6 से 8) के तहत गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों के लिए जारी किया गया है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल मेरिट सूची में श्रेणी पुनर्संयोजन के आधार पर किया गया है, ताकि चयन प्रक्रिया न्यायसंगत और नियमों के अनुरूप रहे.
जिन जिलों के लिए संशोधित सूचियां जारी की गई हैं, उनमें चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, पलामू, रांची और साहिबगंज प्रमुख हैं. आयोग के अनुसार, इन जिलों में मेधा-सह-विकल्प के आधार पर नई चयन सूची तैयार की गई है.
JSSC ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह परिणाम अस्थायी है और झारखंड हाईकोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के बाद इसमें फिर बदलाव संभव है. इसके अलावा, जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र अधूरे या अस्पष्ट पाए गए हैं, उनका परिणाम फिलहाल रोका गया है और उनके मामलों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा.
अभ्यर्थी अपना संशोधित परिणाम JSSC की आधिकारिक वेबसाइट (https://jssc.jharkhand.gov.in/) पर जाकर देख सकते हैं. आयोग ने यह अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है कि यदि भविष्य में कोई तकनीकी या टाइपिंग त्रुटि पाई जाती है, तो उसे बिना किसी पूर्व सूचना के सुधारा जा सकता है.
इस संशोधन ने कई युवाओं की उम्मीदों को नई दिशा दी है, वहीं कुछ के लिए यह असमंजस और मानसिक दबाव का कारण भी बना है. वर्षों की तैयारी और सपनों से जुड़ी इस परीक्षा में पारदर्शिता और संवैधानिक प्रावधानों का पालन समाज में भरोसे को मजबूत करता है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को योग्य और न्यायपूर्ण आधार मिल सके.