मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाना है
कार्यशाला को संबोधित करते हुए चिकित्सकों ने बताया कि फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर दवा सेवन से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। कुल 14700गांव इस कार्यक्रम के दायरे में आते है जिनमें 1करोड़ 70 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।उन्होंने बताया कि एलबेंडाजोल और डीईसी (DEC) की दवाओं के नियमित सेवन से न सिर्फ इस बीमारी से बचाव संभव है, बल्कि जो लोग पहले से संक्रमित हैं, उन्हें भी गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है।
खतरनाक बीमारी से समाज को पूरी तरह
मौके पर मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि फाइलेरिया को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए कहा गया कि सही जानकारी आम जनता तक पहुंचाकर इस बीमारी के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है।स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपील की कि यदि सभी लोग तय समय पर MDA अभियान के दौरान दी जाने वाली दवाओं का सेवन करें, तो इस बेहद खतरनाक बीमारी से समाज को पूरी तरह मुक्त किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फाइलेरिया उन्मूलन अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनने की राह पर है।