यह उत्पादन कार्य पिछले 15 दिनों से जारी है और होली पर्व तक लगातार चलता रहेगा। खास बात यह है कि जॉय ऑफ हैप्पीनेस स्कूल के दिव्यांग छात्र और स्थानीय महिलाएं इस कार्य में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। इससे उन्हें कौशल विकास, नियमित आय और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
प्राकृतिक एवं जैविक रंगों के लॉन्च के अवसर पर रविवार सुबह संस्था के कार्यालय, कदमा रंकणी मंदिर के पास एल5/1, ओल्ड फार्म एरिया में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विधायक सरयू राय उपस्थित रहे। उन्होंने सारथी संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि आमतौर पर पूजा के बाद फूलों को नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है। सारथी संस्था इन फूलों का पुनर्चक्रण कर उन्हें केमिकल-फ्री जैविक रंगों में बदल रही है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संस्था की पूजा अग्रवाल ने बताया कि यह पहल दिव्यांग छात्रों के सामाजिक समावेशन और गरिमा को बढ़ावा देती है। साथ ही यह उन महिलाओं को भी सहारा देती है, जो कुछ नया सीखकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। संस्था का मानना है कि कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है और इसके माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों चन्द्रभान सिंह, डॉ. जी. आर. कांत, राधा शरण एवं अधिवक्ता संजय प्रसाद सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि सारथी संस्था द्वारा तैयार किए गए ऑर्गेनिक रंग शहर के विभिन्न मंदिरों और समुदायों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा मिल रहा है।
यह मॉडल पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक समावेशन और आजीविका निर्माण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल में पूजा अग्रवाल, विजय अग्रवाल, शालिनी अग्रवाल, दीपक, सुशांत, आशीष, अजय कुमार, नेहा, संगीता, सोहिनी और मोनू की अहम भूमिका रही है। सारथी संस्था अपनी नवाचारी और समावेशी पहलों के माध्यम से समाज और पर्यावरण दोनों के लिए निरंतर सकारात्मक बदलाव ला रही है।