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  • 2026-02-09

Jharkhand News: हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति करें, वरना आदेश देगा कोर्ट

Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से खाली पड़े संवैधानिक पदों को लेकर राज्य सरकार को सख्त अल्टीमेटम दिया है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की गई, तो अदालत स्वयं आदेश पारित करेगी.

सरकार ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. वहीं लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष पद पर शीघ्र नियुक्ति कर ली जाएगी. उन्होंने इसके लिए कोर्ट से समय मांगा.

याचिकाकर्ता का आरोप
प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता वी.पी. सिंह ने कहा कि राज्य सरकार इन नियुक्तियों को लेकर लगातार टालमटोल कर रही है. पिछले चार वर्षों से केवल समय मांगा जा रहा है, लेकिन अब तक किसी भी पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है.

छह सप्ताह के भीतर दिया जाएगा नियुक्ति का आदेश 
खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि राज्य सरकार स्पष्ट बताए कि लोकायुक्त और मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष पद पर कब तक नियुक्ति की जाएगी. अदालत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पहल नहीं की, तो छह सप्ताह के भीतर इन पदों पर नियुक्ति का आदेश दिया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है.

पहले भी उठ चुका है मुद्दा
पूर्व सुनवाई में प्रार्थियों ने बताया था कि लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग समेत कई संवैधानिक संस्थाओं के पद तीन से पांच वर्षों से खाली पड़े हैं. इसके बावजूद अब तक इन्हें भरा नहीं जा सका है. इस पर राज्य सरकार ने कहा था कि नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है.

अन्य याचिकाएं भी लंबित
हाईकोर्ट में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर राजकुमार की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई है. इसके अलावा राज्य की 12 संवैधानिक संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त रहने को लेकर भी जनहित याचिका लंबित है.

संवैधानिक संस्थाओं में शीर्ष पदों का लंबे समय तक खाली रहना आम नागरिकों की शिकायत निवारण व्यवस्था को कमजोर करता है. इससे न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा असर पड़ता है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है.
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