Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री कमलेश कुमार सिंह की पत्नी से जुड़ी जमानत की एक शर्त में बदलाव किया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि उनका पासपोर्ट उन्हें वापस किया जाए. हालांकि, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि हर बार विदेश जाने से पहले उन्हें संबंधित अदालत से अनुमति लेनी होगी.
कोर्ट के अनुसार, विदेश यात्रा से पहले याचिकाकर्ता को यात्रा की अवधि और भारत लौटने की तय तारीख बताते हुए लिखित अंडरटेकिंग जमा करनी होगी. विदेश से वापस आने के बाद अदालत को इसकी सूचना देना भी अनिवार्य होगा.
अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम जाने की अनुमति प्रदान
यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाज के उद्देश्य से अमेरिका या यूनाइटेड किंगडम जाने की अनुमति प्रदान की है. इसके साथ ही 13 मई 2014 को पारित उस पुराने आदेश में संशोधन किया गया, जिसमें पासपोर्ट जमा करने और विदेश यात्रा पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे.
कोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हिस्सा है.
आय से अधिक संपत्ति
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता अपने पति, पूर्व मंत्री कमलेश सिंह, के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी हैं और उन्हें पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी है. वर्तमान याचिका केवल उस शर्त के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें उन्हें विदेश जाने से रोका गया था और पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया था.
याचिकाकर्ता की उम्र लगभग 58 वर्ष बताई गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे गंभीर और जानलेवा लिवर रोग से पीड़ित हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि उनके करीबी रिश्तेदार अमेरिका और यूके में रहते हैं, जहां बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं.
उन्होंने यह भी दलील दी कि वर्ष 2014 से वे लगातार ट्रायल में सहयोग कर रही हैं, जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है. मामले में अब तक 100 से अधिक गवाहों में से केवल 46 के बयान ही दर्ज हो सके हैं.
वहीं, सीबीआई ने याचिका का विरोध किया और कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है तथा विदेश यात्रा पर रोक की शर्त जमानत देते समय कोर्ट द्वारा लगाई गई थी.
सभी तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि वर्ष 2014 से याचिकाकर्ता का पासपोर्ट कोर्ट के पास जमा है और उनके खिलाफ ट्रायल में सहयोग न करने या गवाहों को प्रभावित करने का कोई आरोप नहीं है. इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत की शर्तों में संशोधन का आदेश दिया.