Hazaribagh: हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड में सोमवार की सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू लिया। प्लस टू विद्यालय के परीक्षा केंद्र के बाहर जब एक पिता अपने घायल बेटे को कंधे पर उठाकर पहुंचा, तो कुछ पल के लिए पूरा माहौल थम-सा गया। किसी की आंखें भर आईं, तो कोई उस पिता के जज्बे को नमन करता नजर आया। यह सिर्फ एक परीक्षा केंद्र नहीं था, बल्कि वहां एक पिता का सपना, संघर्ष और बलिदान साफ झलक रहा था।
हादसे ने बदला सब कुछ, लेकिन हौसला नहीं टूटा
यह कहानी है केरेडारी थाना क्षेत्र के बेलतू गांव निवासी ओम प्रकाश कुमार की। ओम प्रकाश मैट्रिक का छात्र है और बोर्ड परीक्षा दे रहा है। बीते शनिवार को परीक्षा देकर घर लौटते समय एक तेज रफ्तार बाइक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में उसका बायां पैर गंभीर रूप से टूट गया। दर्द असहनीय था और पूरे परिवार में चिंता और डर का माहौल बन गया। हर कोई यही सोच रहा था कि अब आगे की परीक्षाएं कैसे होंगी।
परीक्षा से बड़ा था बेटे का भविष्य
घर में मातम जैसा सन्नाटा था, लेकिन ओम प्रकाश के पिता रामवृक्ष साव के मन में एक ही बात गूंज रही थी “बेटे की परीक्षा किसी भी हाल में नहीं छूटनी चाहिए।” सोमवार को विज्ञान विषय की परीक्षा थी। बेटा चलने की हालत में नहीं था, लेकिन पिता का हौसला अडिग था। उन्होंने बिना किसी संकोच के बेटे को अपने कंधे पर उठाया और परीक्षा केंद्र की ओर निकल पड़े।
दो किलोमीटर का सफर, दर्द और उम्मीद के साथ
रामवृक्ष साव ने करीब दो किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। हर कदम पर बेटे के दर्द की कराह थी और पिता के चेहरे पर चिंता की लकीरें, लेकिन इन सबसे कहीं बड़ा था बेटे के भविष्य को संवारने का जुनून। रास्ते में जो भी यह दृश्य देखता, वह ठहर जाता। किसी ने मदद का हाथ बढ़ाया, तो किसी ने उस पिता को सलाम किया।
परीक्षा केंद्र पर भावुक हुआ हर शख्स
जब पिता अपने बेटे को परीक्षा केंद्र तक लेकर पहुंचे, तो वहां मौजूद शिक्षक, छात्र और अभिभावक इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। कई लोगों की आंखें नम हो गई। शिक्षकों ने भी छात्र को हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। किसी ने कहा कि यह सिर्फ एक पिता नहीं, बल्कि एक जीती-जागती मिसाल है, जो सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
समाज के लिए एक प्रेरणा
रामवृक्ष साव और उनके बेटे ओम प्रकाश की यह कहानी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में हार मान लेते हैं। एक पिता का अपने बेटे के सपनों के लिए किया गया यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता है कि शिक्षा और भविष्य के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता।