Chaibasa: चाईबासा–डंगुवापोसी मुख्य रेलखंड पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब तालाबुरू सेक्शन में अचानक हाथियों का एक झुंड रेल पटरी पर आ गया। यह घटना किलोमीटर संख्या 337/6-8 और 414/4 के पास हुई, जहां करीब आठ हाथियों को ट्रैक के आसपास विचरण करते देखा गया।
सुबह लगभग 6 बजे हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही रेल महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। संभावित रेल हादसे को टालने के लिए तत्काल प्रभाव से इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। करीब दो घंटे तक यानी सुबह 8 बजे तक इस रेलखंड पर पूरी तरह से आवाजाही ठप रही। बाद में जब हाथियों का झुंड जंगल की ओर लौट गया, तब स्थिति सामान्य हो सकी और ट्रेनों की आवाजाही बहाल की गई।
ट्रैक मेंटेनरों की सतर्कता से टला बड़ा खतरा
जानकारी के अनुसार, नाइट पेट्रोलिंग पर तैनात ट्रैक मेंटेनर और कीमैन ने सबसे पहले हाथियों को ट्रैक के पास देखा। ठंडे मौसम और जोखिम भरे हालात होने के बावजूद उन्होंने साहस और सतर्कता दिखाते हुए तुरंत इसकी सूचना रेलवे प्रशासन को दी। उनकी इसी तत्परता से ही किसी संभावित दुर्घटना को समय रहते टाला गया।
रेलवे अधिकारियों ने मौके की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की और संबंधित सेक्शन में ट्रेनों को रोकने के साथ-साथ लोको पायलटों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए।
ट्रेनों की रफ्तार पर लगी लगाम, लोको पायलटों को विशेष निर्देश
हाथियों की आवाजाही की खबर मिलते ही चक्रधरपुर मंडल मुख्यालय सक्रिय हो गया। एहतियातन इस मार्ग से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की गति कम कर दी गई। लोको पायलटों को निर्देश दिया गया कि वे हॉर्न बजाते हुए और पूरी सावधानी के साथ इस सेक्शन से गुजरें, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने वन विभाग से भी संपर्क किया, ताकि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
रेल कर्मचारियों में भय का माहौल, यूनियन ने उठाई सुरक्षा की मांग
ऑल इंडिया रेलवे ट्रैक मेंटेनर यूनियन के प्रतिनिधि चांद मोहम्मद ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि हाथियों की लगातार आवाजाही से रेल कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर रात में होने वाली नाइट पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक मेंटेनरों की जान पर खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर मंडल के जिन क्षेत्रों को "हाथी जोन" के रूप में चिन्हित किया गया है, वहां फिलहाल कोल्ड वेदर पेट्रोलिंग पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही कीमैन और ट्रैक मेंटेनरों के ड्यूटी रोस्टर में बदलाव कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यूनियन ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं के दौरान किसी रेलकर्मी को जोखिम का सामना न करना पड़े।
इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की स्थिति को उजागर किया है। समय रहते की गई सतर्कता से भले ही बड़ा हादसा टल गया हो, लेकिन यह साफ है कि इस संवेदनशील रेलखंड पर अतिरिक्त सावधानी और समन्वय की आवश्यकता है।