Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के पांचवें सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को विशेष अलर्ट भेजा है. खुफिया सूचनाओं के आधार पर आशंका जताई गई है कि मंत्रियों और विधायकों के आवागमन के दौरान माओवादी या संगठित अपराधी उन पर हमला कर सकते हैं. इस खतरे को देखते हुए मुख्यालय ने संवेदनशील रूटों और स्थलों को चिह्नित कर सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है.
चिह्नित संवेदनशील मार्ग और घाटियां
पुलिस मुख्यालय ने राज्य की उन प्रमुख सड़कों और रेलमार्गों की सूची जारी की है जहां विशेष सतर्कता की आवश्यकता है. इनमें प्रमुख रूप से रांची-हजारीबाग मार्ग पर चुटुपालू और चरही घाटी, रांची-तमाड़ मार्ग पर तैमारा घाटी, और खूंटी-चाईबासा मार्ग पर बंदगांव जंगल शामिल हैं. इसके अलावा लातेहार-पलामू के बीच आमझरिया, नेतरहाट पथ पर गारू घाटी और सरायकेला-कुचाई मार्ग जैसे दुर्गम क्षेत्रों में गश्ती दल बढ़ाने और खुफिया जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और गश्ती के निर्देश
सभी संबंधित जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले नेशनल हाईवे और जंगली रास्तों पर सशस्त्र बलों की तैनाती सुनिश्चित करें. विधानसभा सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों की आवाजाही बढ़ जाती है, इसी का लाभ उठाकर नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं. पुलिस को इन मार्गों पर न केवल गश्ती बढ़ाने को कहा गया है, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने का भी आदेश है.
झारखंड में नक्सलवाद का प्रभाव बीते कुछ वर्षों में कम जरूर हुआ है, लेकिन “गोरिल्ला वारफेयर” की रणनीति के कारण खतरा हमेशा बना रहता है. विशेषकर विधानसभा सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने की धमकी देकर माओवादी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं और सरकार पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहते हैं. पुलिस मुख्यालय द्वारा चिह्नित की गई घाटियां (जैसे चुटुपालू या तैमारा) भौगोलिक रूप से घात लगाकर हमला करने (Ambush) के लिए अनुकूल मानी जाती हैं. ऐसे में केवल सुरक्षा बलों की तैनाती ही काफी नहीं है, बल्कि “एन्टी-नक्सल” ऑपरेशंस और इंटेलिजेंस शेयरिंग को और अधिक सटीक बनाना होगा ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके.