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  • 2025-05-21

Jharkhand Liquor Scam: झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला, मुख्यमंत्री से जुड़े हैं तार, बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप

झारखंड शराब घोटाला मामले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाये हैं.

Jharkhand Liquor Scam: झारखंड शराब घोटाला मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाये हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि शराब घोटाला में मुख्यमंत्री शामिल हैं. वह बतायें कि 3 साल पहले लिखे उनके पत्र (बाबूलाल के पत्र) पर सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री पाक-साफ हैं, तो शराब घोटाले की सीबीआई जांच कराने की अनुशंसा करें.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड में एक व्यक्ति को अवैध तरीके से डीजीपी बनाकर रखा गया है, ताकि घोटालेबाजों को बचाया जा सके. प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गवाहों को धमकी मिल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार गिरफ्तार आईएएस अधिकारी विनय चौबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की चिंता करे.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले की परत जिस तरह से खुल रही रही है, उससे स्पष्ट हो रहा है कि झारखंड में दिल्ली से भी बड़ा शराब घोटाला हुआ है.

मरांडी ने कहा कि उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल 2022 को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों द्वारा झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की निविदा जेसीबीसीएल /02 दिनांक 01 अप्रैल 2022 में अंकित बिंदुओं की अवहेलना कर एक साजिश के तहत छत्तीसगढ़ की विशेष कंपनी को टेंडर देने एवं उससे होने वाले भारी राजस्व की क्षति की ओर ध्यान आकर्षित कराया था.

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पत्र में यह भी बताया गया था कि निविदा की कंडिका 9.3 में 3.90 प्रतिशत अधिकतम लाभांश को बदलकर निविदा डालने वाली इकाइयों से न्यूनतम मार्जिन दर्शाने की बात अंकित है.

इसकी वजह से AtoZ इंफ्रा सर्विस लिमिटेड, प्राइम वन वर्कफोर प्राइवेट लिमिटेड, सुमित फैसिलेशन लिमिटेड और ईगर हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड, जो पूर्व में उनके मनोनुकूल शर्तें नहीं होने के कारण टेंडर नहीं डाल सके थे, टेंडर में भाग ले सकें.

भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को पत्र लिखने के बावजूद सरकार ने उसका संज्ञान नहीं लिया. उन्हें पता था कि गड़बड़ी हो रही है, लेकिन गड़बड़ी रोकने की बजाय उसमें अधिकारियों का साथ दिया और उससे होने वाली कमाई का लाभ भी लिया. बाबूलाल ने कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की जिन कंपनियों के नाम पत्र में लिखे थे, उनकी निविदा मंजूर की गयी, काम भी मिला.

नेता प्रतिपक्ष ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री की नींद तब खुली, जब 27 सितंबर 2024 को अखबार में खबर छपी कि शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ की जांच एजेंसियों ने झारखंड के आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर कार्रवाई की अनुमति मांगी. झारखंड सरकार में बैठे लोगों के कान खड़े हुए. जांच का भय सताने लगा.

इसलिए आनन-फानन में अक्टूबर 2024 में प्राइमरी इन्क्वायरी (पीई) सेटअप की गयी, लेकिन एफआइआर दर्ज नहीं हुआ. इससे स्पष्ट है कि घोटाले पर पर्दा डालने और बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई के बाद हड़बड़ी में जांच शुरू हुई. यह सोची-समझी साजिश है. कल ही एसीबी ने आनन-फानन में विनय चौबे पर एफआईआर दर्ज की और कल ही गिरफ्तार भी कर लिया.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इस घोटाले के पहले भी राज्य के 2 अंचल अधिकारी मनोज कुमार और शैलेश एक घोटाले में ईडी के गवाह हैं.

एसीबी ने मुकदमा दर्ज किया, छापेमारी की, ताकि मामले को लटकाया जा सके. अब गवाहों को धमकी दी जा रही है कि गवाही से मुकर जाओ, नहीं तो कार्रवाई होगी. बाबूलाल ने कहा कि राज्य में एक जमीन से जुड़ा बड़ा मामला है. इसमें 3 लोग उमेश टोप्पो, राज लकड़ा, प्रवीण जायसवाल प्रमुख गवाह हैं. इन पर भी बयानों से मुकरने का दबाव डाला गया. ऐसा नहीं करने पर इन्हें जेल भेज दिया गया, ताकि बड़ी मछलियां न फंसें.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विनय चौबे को गिरफ्तार कर सरकार यह भ्रम फैलाना चाहती है कि वह घोटाले में शामिल नहीं है, जबकि घोटाले के तार मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं.

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शराब घोटाला 2 राज्यों से जुड़ा हुआ है. इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराने की अविलंब अनुशंसा करें. प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रवक्ता अजय साह भी उपस्थित थे.

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