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  • 2026-02-17

Jharkhand News: झारखंड में IAS अधिकारियों का टोटा, 52 पद खाली, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और सेवानिवृत्ति ने बढ़ाई मुश्किल

Jharkhand News: झारखंड में आईएएस कैडर के अधिकारियों की भारी कमी के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है. राज्य में स्वीकृत 224 पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 172 अधिकारी ही कार्यरत हैं. रिक्तियों का यह आंकड़ा 52 तक पहुंच गया है, जिससे कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है.

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात प्रमुख अधिकारी
राज्य के 16 वरिष्ठ अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं:
 
मुख्य सचिव (CS) रैंक: शैलेश कुमार सिंह (सचिव, ग्रामीण विकास), निधि खरे (सचिव, उपभोक्ता मामले) और सत्येंद्र सिंह (अतिरिक्त सचिव, कैबिनेट सचिवालय).
 
प्रधान सचिव रैंक: सुनील वर्णवाल (CEO, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी), राहुल शर्मा (अतिरिक्त सचिव, कैबिनेट सचिवालय), के.के. सोन (निदेशक, जल जीवन मिशन), हिमानी पांडेय (अतिरिक्त सचिव, आंतरिक व्यापार) और आराधना पटनायक (अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य).
 
सचिव रैंक: हर्ष मंगला (निदेशक, स्वास्थ्य), ए. मुत्थु कुमार (निजी सचिव, नीति आयोग उपाध्यक्ष) और अमित कुमार (निजी सचिव, जनजातीय कार्य मंत्री).
 
अन्य अधिकारी: राय महिमा पत रे (विश्व बैंक), शांतनु अग्रहरि (निजी सचिव, राज्य मंत्री), भुवनेश प्रताप सिंह (उप सचिव, आंतरिक व्यापार), आकांक्षा रंजन (उप सचिव, स्वास्थ्य) और बसारत क्यूम (जम्मू-कश्मीर).

सेवानिवृत्त हुए अधिकारी
वर्ष 2025 में मुख्य सचिव समेत कुल 14 अधिकारी अपनी सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे राज्य में अनुभव की भी कमी हुई है:

सेवानिवृत्त अधिकारियों में अलका तिवारी, अजय कुमार सिंह, शशि भूषण मेहरा, शेखर जमुआर, हरि कुमार केशरी, सुमन कैथरिन किस्पोट्टा, बालकिशुन मुंडा, लालचंद दादेल, नेल्सन इयोन बागे, प्रदीप तिग्गा, पूनम प्रभा तिर्की, ज्ञानेंद्र कुमार, अंजनी कुमार मिश्र और पवन कुमार शामिल हैं.

प्रशिक्षण और प्रोन्नति की स्थिति
स्टडी लीव: रवि शंकर शुक्ला और दिव्यांशु झा वर्तमान में उच्च शिक्षा के लिए विदेश में हैं.
 
प्रोन्नति से राहत: हाल ही में 17 अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में प्रोन्नति दी गई है, जिससे कार्यरत अधिकारियों की कुल संख्या अब 189 हो जाएगी.

अधिकारियों की भारी कमी का सीधा असर राज्य की नीति निर्धारण और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर पड़ता है. 52 पदों का खाली होना और अनुभवी चेहरों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार को नई नियुक्तियों और कैडर प्रबंधन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है. हालांकि, प्रोन्नति के जरिए रिक्तियों को भरने की कोशिश की जा रही है, लेकिन 14 वरिष्ठ अधिकारियों के एक साथ सेवानिवृत्त होने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरने में समय लगेगा.
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