Jharkhand News: झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2025 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए झारखंड हाई कोर्ट से राहत भरी खबर आई है. न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने उम्र सीमा में छूट की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए आज ही ऑनलाइन फॉर्म भरने की अनुमति दे दी है. इस आदेश के बाद जेपीएससी ने उन अभ्यर्थियों के लिए एक विशेष लिंक उपलब्ध कराया है, जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.
उम्र सीमा के गणित पर फंसा पेंच
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलील दी कि जेपीएससी की नियमावली के अनुसार हर साल परीक्षा होनी चाहिए और अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट का प्रावधान है. पिछली परीक्षाओं में कट-ऑफ डेट 2017 रखी गई थी, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 1 अगस्त 2026 कर दिया गया है, जिससे हजारों छात्र रेस से बाहर हो गए हैं. अदालत ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जब पिछली दो परीक्षाओं में लाभ मिला है, तो इस बार भी अभ्यर्थियों को अधिकतम उम्र सीमा में राहत मिलनी चाहिए.
रिजल्ट पर रहेगी अदालत की नजर
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों को इस आदेश के तहत फॉर्म भरने की अनुमति मिली है, उनका रिजल्ट हाई कोर्ट की इजाजत के बिना प्रकाशित नहीं किया जाएगा. संगीता कुमारी, दीपक कुमार और अन्य 264 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 1 अप्रैल को होगी. बता दें कि जेपीएससी ने फॉर्म भरने की सामान्य अंतिम तिथि शनिवार निर्धारित की है.
हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश उन युवाओं के लिए संजीवनी जैसा है जो ओवरएज होने के कारण भविष्य को लेकर चिंतित थे. जेपीएससी परीक्षाओं में उम्र सीमा का विवाद झारखंड में नया नहीं है, लेकिन कोर्ट की टिप्पणी कि “परीक्षा हर साल होनी चाहिए” आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है. फिलहाल यह राहत केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित दिख रही है, लेकिन 1 अप्रैल की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या उम्र सीमा में छूट का यह लाभ राज्य के सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से मिल पाएगा या नहीं.