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  • 2026-02-22

JPSC 2025: हेमंत सरकार ने अभ्यर्थियों को दी बड़ी राहत, उम्र सीमा में छूट का संकल्प जारी, जानें क्या है नई कट-ऑफ डेट

JPSC 2025: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शनिवार की रात बड़ी खुशखबरी लेकर आई. राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने आगामी संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए उम्र सीमा में छूट का आधिकारिक संकल्प जारी कर दिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद अब अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष राहत प्रदान की गई है, जिससे हजारों छात्र अब इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे.

अधिकतम उम्र की गणना अब 2022 से
सरकार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, अभ्यर्थियों की अधिकतम उम्र सीमा की गणना अब 1 अगस्त 2022 के आधार पर की जाएगी. वहीं, न्यूनतम आयु की गणना के लिए 1 अगस्त 2026 की तिथि निर्धारित की गई है. हालांकि अभ्यर्थी कट-ऑफ डेट 2018 करने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने वर्तमान रिक्तियों और नियमावली की समीक्षा के बाद 2022 को आधार वर्ष माना है. यह छूट केवल आगामी परीक्षा (2025) के लिए ही प्रभावी होगी.

नियमित परीक्षाएं न होने पर लिया गया फैसला
सरकार ने यह निर्णय छात्रों की उस दलील के बाद लिया है जिसमें बताया गया था कि झारखंड के 25 सालों के इतिहास में अब तक केवल 8 बार ही सिविल सेवा परीक्षाएं आयोजित हो सकी हैं. परीक्षाओं के बीच लंबे अंतराल के कारण कई मेधावी छात्र बिना परीक्षा में बैठे ही ओवरएज हो रहे थे. साल 2023 और 2024 में कोई अलग परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण उन रिक्तियों को भी अब 2025 की परीक्षा में जोड़ दिया गया है.

कुल 148 पदों पर होगी बहाली
नए विज्ञापन के तहत कुल 148 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इसमें सीधी नियुक्ति के 103 पद और बैकलॉग के 45 पद शामिल हैं. कार्मिक विभाग ने इस आदेश को राजपत्र में प्रकाशित करने का निर्देश दे दिया है और इसकी प्रतियां जेपीएससी सहित सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को भेज दी गई हैं. इस फैसले से उन अभ्यर्थियों के चेहरे खिल उठे हैं जो पिछले कई महीनों से उम्र सीमा में छूट के लिए सड़कों से लेकर कोर्ट तक संघर्ष कर रहे थे.

सरकार का यह फैसला जेपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन यह पूरी तरह से छात्रों की उम्मीदों (2018 कट-ऑफ) पर खरा नहीं उतरा है. हालांकि, 2022 को आधार वर्ष बनाने से उन छात्रों को दोबारा मौका मिलेगा जो पिछले 2-3 सालों में दौड़ से बाहर हो गए थे. प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो बैकलॉग और नई रिक्तियों को जोड़कर परीक्षा लेना भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की एक कोशिश है, जो राज्य में अधिकारियों की कमी को दूर करने में सहायक होगी.
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