Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य की वित्तीय स्वायत्तता पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी समय पर न देने या उसमें कटौती करने की कोशिशें की जा रही हैं. इसके जवाब में राज्य सरकार ने तय किया है कि झारखंड अपने आंतरिक संसाधनों को इतना मजबूत करेगा कि भविष्य में उसे केंद्र के आगे हाथ फैलाने की जरूरत न पड़े. यह बयान विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर जवाब देते हुए सामने आया.
कर्ज के बोझ पर विपक्ष को दिया कड़ा जवाब
विपक्ष द्वारा सरकार पर बढ़ते कर्ज के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने तुलनात्मक आंकड़े पेश किए. उन्होंने बताया कि झारखंड ने एफआरबीएम (FRBM) एक्ट के तहत अपनी जीडीपी का मात्र 2.2% ही ऋण लिया है, जबकि भाजपा शासित बिहार (6.6%) और महाराष्ट्र (5% से अधिक) जैसे राज्य कहीं ज्यादा कर्ज के बोझ तले दबे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अभी भी 8,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त ऋण ले सकती है, लेकिन जनता पर कर्ज का बोझ न डालने के इरादे से ऐसा नहीं किया जा रहा है.
बजट खर्च और विकास की रफ्तार का दावा
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक के बजट की कुल राशि का 64 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है और 31 मार्च तक इसके 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने की पूरी उम्मीद है. उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए. वहीं, विधायक उदय शंकर सिंह ने अनुपूरक बजट को विकास का इंजन बताया, तो विधायक सुरेश बैठा ने मंईयां सम्मान योजना के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण का मुद्दा प्रमुखता से रखा.
सीडी रेशियो में सुधार की ओर बढ़ता राज्य
राज्य के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि भले ही देश का औसत 70 से 78% के बीच हो, लेकिन झारखंड ने इसमें सुधार किया है. पूर्ववर्ती सरकार के समय जो अनुपात 48 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर 52 प्रतिशत से अधिक हो गया है. तृतीय अनुपूरक बजट के 6,450 करोड़ रुपये में से बड़ी राशि ग्रामीण विकास, महिला-बाल विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों के लिए सुरक्षित की गई है, जिसे सरकार ने अपनी अनिवार्य जिम्मेदारी (कमिटेड लायबिलिटी) बताया है.
वित्त मंत्री का यह संबोधन झारखंड की वित्तीय नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है. केंद्र पर निर्भरता कम करने और कर्ज के प्रबंधन में कड़ाई बरतना राज्य को लंबी अवधि में आर्थिक मजबूती दे सकता है. हालांकि, अन्य राज्यों की तुलना में कम कर्ज लेना सराहनीय है, लेकिन चुनौती राज्य के भीतर राजस्व के नए स्रोत पैदा करने की है. सरकार का 90% बजट खर्च करने का भरोसा यह दर्शाता है कि चुनावी वर्ष या वित्तीय वर्ष के अंत में योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज है.