संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर
चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे जल्द से जल्द राज्य के संवेदनशील इलाकों की पहचान करें। आयोग ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मार्च के दूसरे सप्ताह तक की समयसीमा तय की है।
इस पहचान प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों को चिह्नित करना है जहाँ चुनावी हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका अधिक है। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की कितनी टुकड़ियाँ तैनात की जाएंगी।
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
आमतौर पर केंद्रीय बलों की तैनाती चुनाव की तारीखों के एलान के साथ होती है, लेकिन बंगाल के पिछले चुनावी इतिहास को देखते हुए आयोग इस बार प्रोएक्टिव मोड में है। बलों को समय से पहले तैनात करने का उद्देश्य एरिया डोमिनेशन करना है ताकि स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भाव पैदा हो। राज्य पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे पुराने अपराधियों और असामाजिक तत्वों की सूची अपडेट करें और उन पर कार्रवाई शुरू करें।
तैयारियों का जायजा
आयोग की इस सक्रियता से स्पष्ट है कि वह सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदान केंद्रों की भौतिक स्थिति और वहां तक पहुँचने वाले रास्तों का बारीकी से निरीक्षण करें।