Shankaracharya Controversy: प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले ने एक नया और चौंकाने वाला रुख अख्तियार कर लिया है. शाहजहांपुर के रमाशंकर दीक्षित ने वाराणसी पहुंचकर यह दावा किया है कि शंकराचार्य को फंसाने के लिए उन्हें और उनकी बेटियों को मोहरा बनाने की कोशिश की गई थी. इस खुलासे ने न केवल दर्ज एफआईआर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि इस पूरे मामले के पीछे एक गहरी साजिश की ओर भी इशारा किया है.
साजिश का पर्दाफाश: प्रलोभन और धमकियों का खेल
रमाशंकर दीक्षित ने वाराणसी के विद्या मठ आश्रम में शंकराचार्य से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि 18 फरवरी को कुछ अज्ञात लोग उनके घर पहुंचे और व्हाट्सएप कॉल के जरिए उनकी बात आशुतोष महाराज से कराई गई. रमाशंकर का आरोप है कि उन्हें एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के बदले भारी आर्थिक मदद का लालच दिया गया, जिसमें उनकी बेटियों के जरिए शंकराचार्य पर यौन शोषण का झूठा आरोप मढ़ना था. इनकार करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई.
कौन है शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय?
शंकराचार्य पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडेय का अतीत काफी विवादित रहा है. जांच में सामने आया है कि वह शामली के कांधला थाने का हिस्ट्रीशीटर (HS संख्या 76 A) है. आशुतोष के खिलाफ गोवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट और आईटी एक्ट समेत कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं. साल 2019 में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी. उसने स्वामी रामभद्राचार्य से दीक्षा लेकर अपना नाम आशुतोष महाराज रख लिया था.
शंकराचार्य का बयान: “आवाज दबाने की राजनीतिक साजिश”
इस खुलासे के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अपनी आवाज दबाने का षड्यंत्र बताया है. उन्होंने कहा कि गौ-हत्या के खिलाफ उनके कड़े स्टैंड के कारण उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. शंकराचार्य ने किसी भी सबूत या सीडी को सार्वजनिक करने की चुनौती देते हुए इसे धार्मिक और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया. उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म को वर्तमान में राजनीतिक कारणों से काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है.