Jharkhand Politics: झारखंड की उत्पाद नीति 2022 को लेकर राज्य में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नई उत्पाद नीति के बहाने बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है. मरांडी का दावा है कि इस नीति के लागू होने के बाद से ही पूरे प्रदेश में शराब के नाम पर “वसूली का खेल” शुरू हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है.
शराब की बोतलों पर ओवरप्राइसिंग का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में शराब की बोतलों पर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक राशि वसूली जा रही है. उन्होंने दावा किया कि जो ग्राहक इस अवैध वसूली का विरोध करते हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हो गई हैं. मरांडी के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट को ऊंचे स्तर तक राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
अधिकारियों की भूमिका और भ्रष्टाचार पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव मनोज कुमार की कार्यशैली पर भी सीधे सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि गुमला, चतरा और कोडरमा जैसे जिलों से अवैध धन उगाही कर विभाग से हर महीने एक बड़ी राशि “ऊपर” तक पहुंचाई जाती थी. मरांडी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि दागी अधिकारियों को दंडित करने के बजाय उन्हें और अधिक महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए बाबूलाल मरांडी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि सरकार को दागी अधिकारियों पर इतना ही भरोसा है, तो उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में ही तैनात कर देना चाहिए. मरांडी के इन आरोपों के बाद अब राज्य की राजनीति में उत्पाद विभाग की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है.