Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ईचागढ़ की विधायक सविता महतो ने अपने क्षेत्र में सिंचाई की बदहाल स्थिति और किसानों की समस्याओं को सदन के पटल पर रखा. उन्होंने अल्प-सूचित प्रश्न के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बावजूद ईचागढ़ विधानसभा के बड़े हिस्से में लिफ्ट सिंचाई की कोई प्रभावी योजना संचालित नहीं है, जिसके कारण हजारों किसान केवल मानसून पर निर्भर रहने को मजबूर हैं.
सरकार ने स्वीकार की किसानों की समस्या
विधायक के सवाल पर सरकार ने सदन में स्पष्ट किया कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र कृषि बाहुल्य है और यहाँ की अधिकांश आबादी आजीविका के लिए खेती पर ही आश्रित है. सरकार ने यह भी माना कि मैसाड़ा सुवर्णरेखा डैम, नीमडीह प्रखंड के ओड़ीया और चांडिल बांध के आसपास के दर्जनों गांवों को वर्तमान में मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस कमी के कारण नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड की लगभग 22 पंचायतों में खेती के लिए पानी का गंभीर संकट बना हुआ है.
26 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए तैयार हुआ प्रस्ताव
सविता महतो की पहल पर सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि सरायकेला-खरसावां के नीमडीह व कुकड़ू प्रखंड और पूर्वी सिंहभूम के पटमदा व बोडाम प्रखंड के ऊंचे इलाकों की प्यास बुझाने की तैयारी कर ली गई है. कुल 26,344 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से “नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना” और “पटमदा-बोडाम मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना” का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है.
केंद्रीय जल आयोग से मिली हरी झंडी
सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर सरकार ने बताया कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए भारत सरकार से वित्तीय सहायता मांगी गई है. राहत की बात यह है कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने इन दोनों महत्वाकांक्षी योजनाओं पर अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है. वर्तमान में योजना को धरातल पर उतारने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. विधायक सविता महतो के इस प्रयास से क्षेत्र के किसानों में नई उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में सिंचाई संकट दूर होगा और कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आएगा.