Iran War Impact: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य ऑपरेशन ने पूरी दुनिया के आर्थिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस टकराव का असर वेनेजुएला जैसे पिछले संकटों से कहीं अधिक व्यापक होगा. इसका सबसे बड़ा कारण ईरान की रणनीतिक स्थिति और तेल उत्पादन है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान रोजाना 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा चीन को निर्यात होता है. सबसे ज्यादा चिंता “होर्मुज जलडमरूमध्य” (Strait Of Hormuz) को लेकर है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट की एक ऐसी लहर आएगी जिससे बचना मुश्किल होगा.
कच्चे तेल और सुरक्षित निवेश के बाजार में दिखेगा बड़ा उछाल
युद्ध की स्थिति को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की तत्काल तेजी आने का अनुमान है. खाड़ी देशों का कच्चा तेल, जो वर्तमान में 72 डॉलर के करीब है, जल्द ही 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है. वहीं, भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक अब शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से निकलकर सोने और चांदी जैसे “सेफ हैवन” की ओर रुख कर रहे हैं. विशेषज्ञों का दावा है कि भारत में सोने की कीमतें 1.85 लाख रुपये प्रति दस ग्राम और चांदी 3.20 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है.
शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी में भारी गिरावट की आशंका
एक तरफ जहां सोना और तेल महंगा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजारों में हड़कंप मचने के आसार हैं. अमेरिकी बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी 1 से 2 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखी जा सकती है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सोमवार को सेंसेक्स 80 हजार अंकों के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल सकता है. डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में भी सप्ताहांत पर बिकवाली का दबाव देखा गया है. बिटकॉइन के दाम गिरकर 63 हजार डॉलर के स्तर तक आ गए हैं और आने वाले दिनों में इसमें 10 प्रतिशत तक की और गिरावट संभव है. फिलहाल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या होर्मुज स्ट्रेट खुला रहता है या युद्ध की आग वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल देती है.