भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में इराक, सऊदी अरब, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद बढ़ाई है, जिससे आयात संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से भी बड़ी मात्रा में तेल खरीदता रहा
चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपने तेल की आपूर्ति रूस, सऊदी अरब, इराक, ईरान और अंगोला जैसे देशों से करता है। प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से भी बड़ी मात्रा में तेल खरीदता रहा है।
वहीं जापान लगभग पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर है। उसकी सप्लाई का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे मिडिल-ईस्ट देशों से आता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर जापान की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा जोखिम मंडरा सकता है।
महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान से जुड़ा संघर्ष और गहराता है या होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान उत्पन्न होता है, तो भारत, चीन और जापान सहित एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर तेल आपूर्ति और कीमतों का दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है, फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। एशियाई देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक मार्गों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज़ में कोई भी हलचल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए शॉक की तरह होगी।