Jharkhand LPG Crisis: झारखंड विधानसभा में राज्य की एलपीजी आपूर्ति को लेकर गहराते संकट पर चिंता जताई गई है. संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते राज्य में गैस की किल्लत बढ़ गई है. मंत्री ने इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियों और वैश्विक बाजार के साथ तालमेल की कमी को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड में घरेलू और कमर्शियल दोनों ही श्रेणियों में गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है.
रिफिल बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव
गैस की कमी को देखते हुए राज्य में सिलेंडर बुकिंग की अवधि बढ़ा दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ना तय है. अब शहरी क्षेत्रों के लिए रिफिल बुकिंग की अवधि 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण इलाकों के लिए 45 दिन कर दी गई है. मंत्री ने बताया कि जहां पहले बुकिंग के 48 घंटे के भीतर गैस मिल जाती थी, वहीं अब इसमें 3 से 4 दिन का समय लग रहा है. वर्तमान में राज्य भर में तीनों प्रमुख तेल कंपनियों यानी IOCL, HPCL और BPCL के कुल 3,27,630 रिफिल पेंडिंग हैं.
कमर्शियल गैस आपूर्ति में भारी गिरावट
राज्य में कमर्शियल गैस की किल्लत सबसे अधिक है. केंद्र सरकार के साथ हुई चर्चा का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति को 80 प्रतिशत से घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया गया है. झारखंड को हर महीने लगभग 2273 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की जरूरत होती है, लेकिन अब केवल 454 मीट्रिक टन ही मिल पाएगी. इस भारी कटौती से रांची और जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहरों के कैंटीन, होटल और छोटे उद्योगों पर संकट मंडराने लगा है.
वैश्विक हालात और केंद्र की नीतियों पर प्रहार
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता का असर अब झारखंड की रसोई तक पहुंच गया है. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि रूस से तेल खरीदने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन यह वैश्विक दरों पर मिलेगा और कोई विशेष डिस्काउंट नहीं होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संकट लंबा खिंचा तो देश की आर्थिक और मौद्रिक नीतियां चरमरा सकती हैं. इसके साथ ही सरकार ने उर्वरक आपूर्ति को लेकर भी केंद्र से स्पष्ट रणनीति की मांग की है.