Jamshedpur: सरयू राय ने झारखंड विधानसभा में अपने निजी विधेयक को प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं मिलने पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पूरे सत्र के दौरान उन्हें उम्मीद थी कि उनका प्रस्ताव सदन में रखा जाएगा, लेकिन अंतिम दिन तक ऐसा नहीं हो सका।
अध्यक्ष को लिखे गए दो पत्र
इस मुद्दे को लेकर विधायक सरयू राय ने विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो को दो बार पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित किया। पहला पत्र जनवरी में भेजा गया था, जिसमें उन्होंने अपने विधेयक को सदन में पेश करने की जानकारी दी थी। वहीं मार्च में भेजे गए दूसरे पत्र में उन्होंने संसदीय प्रक्रिया का हवाला देते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की।
प्रक्रिया में देरी पर उठाए सवाल
सरयू राय का कहना है कि डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस मामले में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने इसे संसदीय अधिकारों के अनुरूप नहीं बताते हुए निराशाजनक बताया।
जीवाश्म संरक्षण के लिए कानून की जरूरत
विधायक ने अपने प्रस्तावित “झारखंड भू विरासत (जीवाश्म) विधेयक 2026” के महत्व को बताते हुए कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में दुर्लभ जीवाश्म पाए जा रहे हैं। खासकर राजमहल क्षेत्र और साहेबगंज में इनकी संख्या अधिक है, जहां एक जीवाश्म पार्क भी स्थापित किया गया है।
प्राकृतिक धरोहर पर बढ़ता खतरा
उन्होंने चिंता जताई कि मानव गतिविधियों के कारण इन महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंच रहा है। वर्तमान में इनके संरक्षण के लिए कोई ठोस कानूनी प्रावधान नहीं है, जिससे इनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है।
स्पष्ट कानून बनाने की मांग
सरयू राय ने सरकार से अपील की है कि राज्य की इस अनमोल भू-विरासत को बचाने के लिए जल्द से जल्द एक प्रभावी कानून बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके।