Jharkhand Politics: झारखंड विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा हाल ही में दी गई एक टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि "हिंदू देवी देवताओं और उनकी पूजा पद्धति पर किए गए प्रहार को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा."
संवैधानिक मर्यादा पर उठाए सवाल
आदित्य साहू के अनुसार, विधानसभा जैसे प्रतिष्ठित मंच का उपयोग हिंदू आस्था का उपहास उड़ाने के लिए करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करना मुख्यमंत्री जैसे उच्च संवैधानिक पद की गरिमा के प्रतिकूल है. भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में बैठे व्यक्ति को ऐसी शब्दावली से बचना चाहिए.
तुष्टिकरण और कांग्रेस की विचारधारा का आरोप
साहू ने मुख्यमंत्री के व्यवहार की तुलना राहुल गांधी की कार्यशैली से करते हुए आरोप लगाया कि "हेमंत सोरेन अब तुष्टिकरण की राजनीति के वशीभूत होकर अपनी सीमाओं को लांघ रहे हैं." उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा के प्रति विरोध की जो मानसिकता कांग्रेस में रही है, वही अब झारखंड सरकार में भी नजर आने लगी है.
सनातन संस्कृति की अडिगता और सरकार का विरोधाभास
सनातन परंपरा के गौरव का उल्लेख करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इसे मिटाने के प्रयास युगों से होते आए हैं, परंतु भारत की पहचान साधु संतों और मंदिरों की इस संस्कृति को कोई हिला नहीं सका. उन्होंने सरकार पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री निजी तौर पर तो पूजा पाठ करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उसी धर्म की मान्यताओं को कठघरे में खड़ा करते हैं.
त्योहारों पर पाबंदी और माफी की चेतावनी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने रामनवमी के दौरान झंडे की ऊंचाई और डीजे के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि "सरकार की ऐसी नीतियां जनता के बीच असंतोष पैदा कर रही हैं." उन्होंने अंत में पुरजोर मांग की कि "मुख्यमंत्री को अपने बयानों के लिए हिंदू समाज से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए."