Navratri Day 2: नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत कथा और आरती पढ़ना बहुत जरूरी माना जाता है। ऐसा करने से पूजा पूरी मानी जाती है और भक्तों को पूरा फल मिलता है।मां ब्रह्मचारिणी सफेद रंग प्रिय हैं, जो हमें ज्ञान, संयम और आत्मबल देती हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
माता ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय में हुआ था। नारद जी की सलाह पर उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए बहुत कठिन तपस्या की।
शुरू में उन्होंने हजारों साल तक सिर्फ फल-फूल खाए। इसके बाद कई साल तक बिना कुछ खाए सिर्फ जमीन पर रहकर तप किया। उन्होंने धूप, बारिश और ठंड की भी परवाह नहीं की। उनकी इस कठिन तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
पूजा करने की विधि
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें
मां की फोटो या मूर्ति चौकी पर रखें
गंगाजल से जगह को शुद्ध करें
रोली, अक्षत, फूल और पंचामृत चढ़ाएं
दीपक और धूप जलाकर पूजा करें
मंत्र जाप करें और कथा पढ़ें
अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें
मां को क्या भोग लगाएं
मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर (चीनी) बहुत पसंद है। इसलिए पूजा में शक्कर का भोग जरूर लगाएं।ऐसा करने से आयु बढ़ती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।इसके अलावा फल और पंचामृत भी चढ़ाया जा सकता है।
माना जाता है कि सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सफलता जरूर मिलती है।