Jharkhand News: झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव (PA) संजीव लाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अब मंगलवार 24 मार्च को सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ के समक्ष इन याचिकाओं पर सुनवाई निर्धारित थी. कार्यवाही शुरू होते ही शीर्ष अदालत ने मामले की संवेदनशीलता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि "यह एक अत्यंत गंभीर प्रकरण है क्योंकि आप्त सचिव के करीबी के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये की भारी नकदी बरामद हुई थी."
शपथ पत्र पर जवाब देने के लिए मांगा समय
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में पहले ही एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल कर घटनाक्रम का पूरा ब्योरा अदालत को सौंप दिया है. न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद संजीव लाल और आलमगीर आलम के अधिवक्ताओं ने ईडी के शपथ पत्र पर अपना पक्ष रखने और जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की. बचाव पक्ष के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 24 मार्च की तिथि सुनिश्चित कर दी है.
करोड़ों की नकदी और कमीशन चार्ट की बरामदगी
उल्लेखनीय है कि ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी ने मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल के करीबी जहांगीर आलम के घर पर छापेमारी कर "32.20 करोड़ रुपये नकद" बरामद किए थे. इसके अलावा जांच के दौरान आप्त सचिव के कंप्यूटर से एक महत्वपूर्ण डिजिटल चार्ट भी मिला था. इस चार्ट में विभाग द्वारा जारी किए गए टेंडरों और उनमें कथित तौर पर तीन प्रतिशत की दर से कमीशन की गणना का पूरा हिसाब दर्ज था.
निगरानी की प्राथमिकी से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की जड़ें ग्रामीण विकास विभाग के जूनियर इंजीनियर एसपी वर्मा की गिरफ्तारी से जुड़ी हैं. निगरानी विभाग द्वारा दर्ज की गई इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने "मनी लॉन्ड्रिंग" (Money Laundering) के तहत अपनी जांच शुरू की थी. जांच के क्रम में मुख्य अभियंता और अन्य ठेकेदारों के ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे. जहांगीर और संजीव लाल से मिली सूचनाओं के आधार पर ही तत्कालीन मंत्री को समन जारी किया गया था और गिरफ्तारी के बाद से ही वे लगातार जेल में बंद हैं.