Jharkhand News: बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी के मामले में दायर "हैबियस कॉर्पस" (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण राय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. यह याचिका लापता युवती की मां रेखा देवी द्वारा अपनी बेटी की तलाश के लिए दाखिल की गई थी. कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बोकारो एसपी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है.
प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पर कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान वर्चुअल माध्यम से जुड़े बोकारो एसपी से खंडपीठ ने पूछा कि "जब 24 जुलाई 2025 को ही इस मामले में सनहा दर्ज कर लिया गया था, तो प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में इतनी देरी क्यों की गई." अदालत ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि 4 अगस्त 2025 को प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद संबंधित थाना प्रभारी ने समय रहते ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की. कोर्ट ने पुलिस की इस सुस्ती को गंभीरता से लिया है.
सीबीआई जांच के दिए संकेत और रिकॉर्ड तलब
उच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि यदि पुलिस की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मामले की जांच "सीबीआई" (CBI) को सौंपी जा सकती है. खंडपीठ ने बोकारो एसपी को निर्देश दिया है कि वे अगली तारीख पर केस डायरी और निचली अदालत के सभी संबंधित रिकॉर्ड के साथ खुद कोर्ट में हाजिर हों. अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा और कानून के पालन में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.