हादसे के तुरंत बाद स्थानीय
ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को सरायकेला सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने
उन्हें जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया. चिकित्सकों के अनुसार तीनों
युवकों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है.
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि दुगनी गांव
में लंबे समय से जर्जर पोल और ढीले तारों की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन बिजली विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से
नहीं लिया. इसी लापरवाही के चलते यह बड़ा हादसा घटित हुआ. घटना के बाद क्षेत्र में
भारी आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों ने बिजली विभाग की लापरवाही पर कड़ा विरोध
जताया है और चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जर्जर तारों और पोलों की मरम्मत नहीं की
गई और घायलों के परिजनों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे.
जिम्मेदारी तय हो, भविष्य में न हो पुनरावृत्ति
यह हादसा बिजली विभाग की गंभीर
लापरवाही को उजागर करता है और प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की
आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की
पुनरावृत्ति रोकी जा सके. फिलहाल, जिला
प्रशासन और बिजली विभाग की ओर से किसी प्रकार का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.