Naxal Victim Compensation: पश्चिमी सिंहभूम जिले में उग्रवादी हिंसा के शिकार हुए परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें राहत पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है. वित्तीय वर्ष "2025-26" के दौरान अब तक उग्रवाद प्रभावित सात परिवारों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी और वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है. जिला समाहरणालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस मानवीय पहल की प्रगति की समीक्षा की गई और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का खाका तैयार किया गया.
उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई अनुकंपा समिति की बैठक
जिला उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता और पुलिस अधीक्षक अमित रेनू की उपस्थिति में "जिला स्तरीय अनुकंपा एवं अनुग्रह अनुदान समिति" की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई. बैठक में बताया गया कि वर्तमान सत्र में 7 पीड़ितों को लाभ दिया जा चुका है, जबकि 4 नए प्रस्ताव समिति के समक्ष रखे गए हैं. इन नए मामलों में से 3 आवेदन अनुकंपा नियुक्ति व वित्तीय अनुदान से संबंधित हैं, जबकि 1 मामला केवल आर्थिक सहायता (अनुग्रह अनुदान) से जुड़ा है. अधिकारियों ने सभी दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच कर आगे की कार्रवाई के लिए अपनी अनुशंसा भेज दी है.
दस्तावेजों की कमी दूर करने के लिए विशेष शिविर का निर्देश
समीक्षा के दौरान कुल 14 मामलों के कागजातों की पड़ताल की गई, जिनमें से 10 आवेदनों में कुछ अनिवार्य दस्तावेजों की कमी पाई गई. इस पर उपायुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अंचलाधिकारी और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि "वे प्राथमिकता के आधार पर सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराएं." इसके अतिरिक्त, उग्रवादी हिंसा से जुड़े 24 अन्य नए मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए उपायुक्त ने अधिकारियों को विशेष शिविर आयोजित करने का आदेश दिया है, ताकि दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी हो सके.
प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर उपायुक्त प्रवीण केरकट्टा, सामान्य शाखा प्रभारी देवेंद्र कुमार और सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टुटी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. प्रशासन का लक्ष्य है कि हिंसा से प्रभावित परिवारों को "बिना किसी प्रशासनिक देरी के" उनका हक मिले. बैठक के अंत में स्थापना शाखा प्रभारी कुमार हर्ष और विभिन्न अंचलों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया गया ताकि पीड़ितों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें.