Seraikela Big News: सरायकेला प्रखंड के खापरसाई स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में मंगलवार को एक जर्जर स्कूल भवन का छज्जा गिरने से अफरा-तफरी मच गई. सौभाग्य से मध्यान्ह भोजन की घंटी बजने के कारण अधिकांश बच्चे कमरे से बाहर थे, अन्यथा एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी. इस घटना में तीन छात्राएं घायल हुई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि 1985 में बना यह भवन लंबे समय से असुरक्षित है और प्रधानाध्यापिका द्वारा लिखित चेतावनी दिए जाने के बावजूद विभाग ने कोई सुध नहीं ली. अब बच्चे स्कूल के भीतर बैठने से डर रहे हैं और खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं.
कुकड़ु में 12 वर्षों से अधूरा है आंगनबाड़ी का सपना
जिले के कुकड़ु प्रखंड अंतर्गत सपादा गांव में पिछले एक दशक से भी अधिक समय से नौनिहालों का भविष्य अधर में लटका हुआ है. यहां बच्चे पिछले 12 वर्षों से आंगनबाड़ी भवन के अभाव में कटहल और काजू के पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ने को विवश हैं. चार साल पहले भवन निर्माण की स्वीकृति मिली और काम शुरू भी हुआ, लेकिन वह आज तक पूरा नहीं हो सका. मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने के पानी और शौचालय के अभाव के बीच, जर्जर कमरों में बनता मध्यान्ह भोजन किसी भी वक्त हादसे का सबब बन सकता है. अभिभावकों में सड़क किनारे खुले में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता बनी हुई है.
नीमडीह में शिक्षकों की लापरवाही से डूबा बच्चों का साल
नीमडीह प्रखंड के टेंगाडीह गांव से शिक्षा विभाग की घोर संवेदनहीनता का मामला सामने आया है, जहां एडमिट कार्ड न बनने के कारण 11 छात्र 8वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की इस चूक ने गरीब परिवारों के बच्चों का एक साल बर्बाद कर दिया है. ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि 15 कमरों वाले इस स्कूल में पढ़ाई केवल एक कमरे में सिमटी है और कुछ शिक्षक नशे की हालत में विद्यालय आते हैं. डेस्क-बेंच और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच लकड़ी के चूल्हे पर बनता खाना और शिक्षकों की अनुपस्थिति इस क्षेत्र के शैक्षणिक वातावरण को पूरी तरह दूषित कर रही है.
प्रशासनिक जांच और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल
इन घटनाओं ने जिले के शिक्षा निगरानी तंत्र और बायोमेट्रिक हाजिरी जैसी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है. जिला शिक्षा अधीक्षक कैलाश मिश्रा ने मामलों का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं और परीक्षा से वंचित बच्चों के लिए विशेष इंतजाम करने का भरोसा दिलाया है. साथ ही, दोषी पाए जाने वाले लापरवाह शिक्षकों पर बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है. हालांकि, बड़ा सवाल अब भी यही बना हुआ है कि क्या कागजी बैठकों से निकलकर प्रशासन जमीनी स्तर पर स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगा या किसी बड़े हादसे के बाद ही तंत्र की नींद टूटेगी.