Jharkhand Freebies Schemes: झारखंड की हेमंत सरकार सामाजिक सुरक्षा की दिशा में आक्रामक रूप से काम कर रही है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना पर 14,065.57 करोड़ रुपये और सर्वजन पेंशन पर 3,517.23 करोड़ रुपये खर्च करने का भारी-भरकम प्रावधान किया है. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ऊर्जा खुशहाली योजना के तहत 35 लाख परिवारों को हर माह 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिस पर सालाना 5,405 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है.
जेएमएम: राजस्व बढ़ाना प्राथमिकता
वेतन कटौती के सवाल पर सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने स्पष्ट किया कि राज्य में ऐसी नौबत नहीं आएगी. पार्टी प्रवक्ता मनोज पांडेय का कहना है कि सरकार वेतन काटने के बजाय राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. सरकार की रणनीति केंद्र के पास बकाया राशि को वापस लाने और आय के स्रोतों को मजबूत करने की है. जेएमएम का मानना है कि यदि वित्तीय प्रबंधन सही रहा, तो जनकल्याणकारी योजनाएं बिना किसी कटौती के निर्बाध रूप से चलती रहेंगी.
भाजपा: वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप
वहीं, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने सरकार पर “वित्तीय कुप्रबंधन” का आरोप लगाते हुए कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में करोड़ों के घालमेल का हिसाब नहीं मिल रहा है. भाजपा का तर्क है कि सरकार आय के नए स्रोत विकसित करने में विफल रही है और केवल लोक-लुभावन घोषणाओं के दम पर चल रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन नहीं सुधरा, तो झारखंड का हाल भी हिमाचल जैसा हो सकता है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
झारखंड सरकार को उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में कर राजस्व से 46,000 करोड़ और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी से 51,236 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे. यदि यह राजस्व वसूली लक्ष्य के अनुसार होती है, तो फ्रीबीज योजनाओं पर संकट नहीं आएगा. हालांकि, बढ़ते लोक ऋण (22,049 करोड़ रुपये का अनुमान) को लेकर विशेषज्ञों की चिंता बरकरार है. अब देखना यह है कि क्या झारखंड अपनी इन महत्वाकांक्षी योजनाओं और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रख पाता है.