Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव में पड़ोसी राज्यों बिहार और असम के सियासी समीकरणों का गहरा असर दिख रहा है. असम विधानसभा चुनाव में झामुमो (JMM) द्वारा स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारने के बाद कांग्रेस के साथ उनके रिश्तों में कड़वाहट आई है. गठबंधन दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर दिख रही इसी दरार का फायदा उठाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरी तरह सक्रिय हो गई है. हालांकि, संख्या बल के हिसाब से फिलहाल महागठबंधन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, लेकिन अंदरूनी कलह खेल बिगाड़ सकती है.
सीटों का गणित और जीत के चार विकल्प
झारखंड की एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. वर्तमान में महागठबंधन के पास 56 विधायक (JMM-34, कांग्रेस-16, राजद-4, माले-2) हैं, जिससे वे दोनों सीटें आसानी से जीत सकते हैं. वहीं, एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, यानी भाजपा को एक सीट के लिए केवल 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है. सियासी गलियारों में चार विकल्प चर्चा में हैं: क्या झामुमो दोनों सीटों पर दावा ठोकेगा, या कांग्रेस को एक सीट देकर गठबंधन धर्म निभाएगा, या फिर भाजपा सेंधमारी कर एक सीट अपने नाम करने में सफल होगी.
झामुमो की चुप्पी और कांग्रेस की उम्मीदें
झामुमो ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे सस्पेंस बरकरार है. पार्टी के विश्वस्त सूत्रों का संकेत है कि अपनी मजबूती को देखते हुए झामुमो दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मन बना सकता है. दूसरी ओर, कांग्रेस को उम्मीद है कि गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए उसे एक सीट दी जाएगी. अगर झामुमो दोनों सीटों पर अड़ा रहता है, तो कांग्रेस की नाराजगी भाजपा के लिए "सुनहरा अवसर" बन सकती है, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
भाजपा का दावा: चुनावी गणित हमारे पक्ष में
राज्यसभा चुनाव की इस जंग में भाजपा बेहद आत्मविश्वास में नजर आ रही है. भाजपा प्रवक्ता का दावा है कि चुनावी गणित उनके पक्ष में है और पार्टी निश्चित रूप से अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी. बिहार और असम के राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गठबंधन को एकजुट रख पाते हैं या भाजपा की रणनीति महागठबंधन के अभेद्य किले में दरार डालने में सफल होती है.