Jharkhand Crime News: झारखंड में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गिरोह को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं. पुलिस एक तरफ जहां इस गैंग के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर गिरोह से जुड़े राहुल राणा के परिवार में डर का माहौल बना हुआ है. परिजनों को आशंका है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस राहुल का एनकाउंटर कर सकती है, इसलिए वे लगातार प्रशासन से कानूनी प्रक्रिया अपनाने की अपील कर रहे हैं.
छोटे व्यवसाय से अपराध की दुनिया तक पहुंचा राहुल
रांची के लालपुर इलाके का रहने वाला राहुल राणा पहले सुअर के कारोबार से जुड़ा था. इसी दौरान उसकी पहचान प्रिंस खान से हुई और वह धीरे-धीरे गैंग का हिस्सा बन गया. एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के टीटोस रेस्टोरेंट में हुई हत्या के बाद उसका नाम तेजी से सामने आया. जांच में पता चला है कि वह व्यापारियों के मोबाइल नंबर गैंग तक पहुंचाता था, जिससे उनसे रंगदारी वसूली की जाती थी.
गैंग में अहम भूमिका निभा रहा था राहुल
धनबाद में भागाबांध मुठभेड़ के बाद पकड़े गए अपराधी अमन सिंह उर्फ कुबेर ने पूछताछ में बताया कि रांची में गैंग को संचालित करने की जिम्मेदारी दो लोगों पर थी. कौशल पांडे व्यापारियों की जानकारी जुटाता था, जबकि राहुल राणा उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करवाता था जो रंगदारी देने से इनकार करते थे. वह शूटर और हथियार उपलब्ध कराने का काम भी देखता था. खास बात यह है कि बाहर से वह खुद को एक सामान्य और साफ-सुथरी छवि वाला व्यक्ति दिखाता था.
पाकिस्तान में छिपा है प्रिंस खान
जांच के दौरान पुलिस को कुबेर के मोबाइल से एक अहम सुराग मिला. इसमें प्रिंस खान का एक पाकिस्तानी पहचान पत्र मिला है, जिससे पता चला कि वह अब “फैज खान” नाम से पाकिस्तान में रह रहा है. उसके आईडी पर बहावलपुर का पता दर्ज है, जो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ माना जाता है. पुलिस को शक है कि गैंग के जरिए वसूली गई रकम का संबंध आतंकी नेटवर्क से भी हो सकता है.
फिलहाल रांची पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और राहुल राणा समेत गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है. साथ ही इस पूरे मामले में संभावित संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच तेज कर दी गई है.