Chaibasa Student Suicide: चाईबासा शहर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सूरजमल जैन डीएवी पब्लिक स्कूल के कक्षा 11 (विज्ञान) के छात्र रौनक प्रधान ने आत्महत्या कर ली. वह शहर के टुंगरी निवासी अविनाश प्रधान का इकलौता पुत्र था. बुधवार 25 मार्च को विद्यालय ने 11वीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किए थे, जिसमें रौनक को कई महत्वपूर्ण विषयों में उम्मीद से बहुत कम अंक मिले थे. इस परिणाम को देखने के बाद से ही वह गहरे तनाव में था और अंततः उसने घर के भीतर दुपट्टे का फंदा लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली.
परीक्षा परिणाम आते ही घर में छा गया मातम
बताया जा रहा है कि रौनक पढ़ाई में गंभीर था और उसे अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन अंक कम आने की बात वह बर्दाश्त नहीं कर सका. जैसे ही उसके निधन की खबर फैली, पूरे टुंगरी क्षेत्र और स्कूल परिसर में शोक की लहर दौड़ गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि एक छोटे से परीक्षा परिणाम के कारण उनका बेटा ऐसा कदम उठा लेगा.
शहर में सनसनी, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल
इस दुखद घटना ने पूरे चाईबासा शहर में सनसनी फैला दी है. शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए चिंता का विषय बताया है. लोगों का कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में बच्चों पर परीक्षा का दबाव इतना बढ़ गया है कि वे असफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की जा रही है कि वे परिणामों के समय बच्चों को अकेला न छोड़ें और उनके साथ संवादात्मक रुख अपनाएं ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके.
विशेषज्ञों की राय: संवाद ही एकमात्र समाधान
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों को हार या कम अंकों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना बेहद जरूरी है. स्कूल प्रबंधन और समाज के लोगों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि केवल अंक किसी बच्चे की पूरी काबिलियत तय नहीं करते. शहर के बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से भी मांग की है कि स्कूलों में नियमित रूप से काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं ताकि छात्र तनावमुक्त होकर शिक्षा ग्रहण कर सकें.