Iran Israel Conflict: ईरान-इजरायल के बीच चल रहे तनाव को लेकर भारत में भी राजनीति गरमा गई है। सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया।
सरकार के बयान पर विपक्ष का पलटवार, समर्थन के साथ उठाए सवाल
बैठक में सरकार ने साफ कहा कि भारत, पाकिस्तान जैसा “दलाल” देश नहीं है। इस पर विपक्ष ने प्रतिक्रिया दी। शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत ने सरकार को घेरा, हालांकि उन्होंने कुछ बातों पर समर्थन भी किया।
प्रियंका चतुर्वेदी का बयान, समर्थन के साथ सरकार की देरी पर सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने X पर लिखा कि उन्हें पाकिस्तान को “दलाल” कहने से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ऐसा ही है। लेकिन उन्होंने सरकार पर सवाल उठाया कि भारत ने इस मुद्दे पर अपना रुख तय करने में देर क्यों की और ईरान से बात करने में देरी क्यों हुई। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी स्थिति में भारत की भूमिका ज्यादा मजबूत होनी चाहिए थी।
संजय राउत का सवाल: क्या मध्यस्थता करने वालों को भी “दलाल”कहा जाएगा
वहीं संजय राउत ने भी सरकार के शब्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस मामले में बीच बचाव करते हैं, तो क्या उन्हें भी “दलाल” कहा जाएगा?
एस. जयशंकर का कड़ा रुख, पाकिस्तान की मध्यस्थता बेअसर, भारत अलग पहचान वाला देश
सरकार की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया कि पाकिस्तान की हस्तक्षेप की कोई अहमियत नहीं है। उन्होंने कहा कि 1981 से ही अमेरिका अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता रहा है। इसलिए भारत खुद को ऐसे किसी देश की तरह नहीं देखता।
सरकार का जवाब,भारत सक्रिय, प्राथमिकता भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतें
सरकार ने यह भी कहा कि भारत चुप नहीं है। विदेश सचिव ने तुरंत ईरानी एम्बेसी से संपर्क किया था। साथ ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।