Us Iran Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए चिंता बढ़ने लगी है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर पूर्व रॉ प्रमुख विक्रम सूद ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. उनका कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले महीनों में भारत को तेल और महंगाई से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
दो से तीन महीने में दिख सकता है असर
एक बातचीत के दौरान विक्रम सूद ने संकेत दिया कि इस संघर्ष का सीधा असर तुरंत नहीं बल्कि अगले दो से तीन महीनों में सामने आ सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के पास तेल और खाद का भंडार सीमित है. देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों पर निर्भर है. अगर युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित होती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी निर्भरता
सूद ने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है.
भारत का बड़ा व्यापार और तेल आयात इसी रास्ते से होता है. ऐसे में अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
भूराजनीतिक स्थिति पर भी उठाए सवाल
पूर्व रॉ प्रमुख ने इस संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह स्थिति एक तरह से बिना औपचारिक घोषणा के युद्ध जैसी है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में कुछ देशों ने ईरान की ताकत और उसकी प्रतिक्रिया क्षमता को कम आंक लिया है, जिसका असर अब साफ दिख रहा है.
युद्ध का असर वैश्विक बाजार पर कैसा रहेगा
मौजूदा हालात में युद्ध का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
इसका असर आगे चलकर भारत में परिवहन खर्च, हवाई किराए और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है.
सरकार ने भी जताई चिंता
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी राज्यों को सतर्क रहने के संकेत दिए हैं. आने वाले समय में आपूर्ति और कीमतों को संतुलित रखना बड़ी चुनौती हो सकती है.
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है. इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में स्थिति पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा.