India Semiconductor Mission: वित्त मंत्रालय ने ,"इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0" के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दे दी गई है। कहा जा रहा है कि इस प्रस्ताव को अप्रैल के मध्य में आखरी मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर सेक्टर में मजबूत बनाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि चिप डिजाइन पर भी जोर
इस बार ISM 2.0 में फोकस पहले के मुकाबले थोड़ा अलग होगा। जहां पहले ज्यादा ध्यान मैन्युफैक्चरिंग पर था, वहीं अब सरकार रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D), चिप डिजाइन और नई टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान देगी। इसका मतलब ये है कि भारत अब सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा।
नई चिप टेक्नोलॉजी से भारत की टेक पावर को रफ्तार
इस योजना की एक खास बात ये है कि इसमें एडवांस्ड सेमीकंडक्टर तकनीक जैसे 2nm और 3nm नोड्स पर भी काम करने की तैयारी की जा रही है। इससे भारत को दुनिया के बड़े चिप मैन्युफैक्चरिंग देशों के करीब पहुंचने में मदद मिलेगी।
पहले फेज में भारी निवेश, सेमीकंडक्टर सेक्टर को मिला बूस्ट पहले फेज ISM 1.0 की बात करें, तो उसका बजट 76,000 करोड़ रुपये था। इस चरण में सरकार ने 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी, जिनमें कुल निवेश करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये था इसके अलावा, 2021 में शुरू किए गए 10 अरब डॉलर के इंसेंटिव प्रोग्राम के तहत सरकार ने प्रोजेक्ट लागत का 50 फीसदी तक समर्थन देने की भी पेशकश की थी।
बड़े निवेश के साथ भारत बन रहा चिप हब
इस दौरान कई बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है। माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुजरात में सेमीकंडक्टर असेंबली यूनिट स्थापित की है। टाटा ग्रुप भी गुजरात में एक बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट बना रहा है। वहीं, फॉक्सकॉन टेस्टिंग और असेंबली से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इसके अलावा, केन्स टेक्नोलॉजी ने सानंद में अपनी यूनिट में उत्पादन शुरू कर दिया है। भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ये निवेश और नई योजनाएं आने वाले समय में भारत को ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में एक मजबूत देश बना सकती हैं।