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  • 2026-04-02

Supreme Court DGP Appointment: डीजीपी नियुक्ति विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड और यूपी से पूछा- “प्रकाश सिंह जजमेंट” के तहत UPSC को क्यों नहीं भेजा प्रस्ताव?

Supreme Court DGP Appointment: सुप्रीम कोर्ट ने देश के राज्यों में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से संबंधित एक अवमानना याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने झारखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर सीधे तौर पर यह कारण बताने का निर्देश दिया है कि उन्होंने डीजीपी की नियुक्ति के लिए पात्र अधिकारियों का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को क्यों नहीं भेजा? मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में दोनों राज्यों की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद ही अगली सुनवाई की जाएगी.

स्वतंत्र कानून नहीं तो “प्रकाश सिंह” गाइडलाइंस अनिवार्य
डीजीपी नियुक्ति से जुड़े इस मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पुलिस सुधारों को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी है. अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि जिन राज्यों ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपना खुद का अलग कानून या नियमावली बनाई है, उन्हें उस कानून का ही पालन करना होगा. लेकिन, जिन राज्यों में ऐसा कोई विशेष कानून नहीं है, उन्हें “प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ” ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कड़े दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना ही होगा.

क्या है प्रकाश सिंह मामला और यूपीएससी का रोल?
सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त निर्देश तब दिया जब कोर्ट को यह जानकारी मिली कि झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी अलग नियमावली बनाई तो है, लेकिन वे तय प्रक्रिया से बच रहे हैं. प्रकाश सिंह मामले के मूल दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को वरिष्ठतम और योग्य पुलिस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजने होते हैं. इसके बाद यूपीएससी इनमें से तीन सबसे योग्य अधिकारियों का एक पैनल चुनकर राज्य को लौटाता है, और फिर राज्य सरकार उन्हीं तीन में से किसी एक को 2 वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए डीजीपी चुनती है.

पुलिस सुधारों और राजनीतिक हस्तक्षेप पर बड़ी बहस
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब झारखंड और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को कोर्ट के समक्ष अपना ठोस पक्ष रखना होगा. इस फैसले को पुलिस महकमे में होने वाले राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करने और अधिकारियों को निष्पक्षता से काम करने की आजादी देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि अगर राज्य संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो कोर्ट डीजीपी की वर्तमान नियुक्तियों पर भी कड़े निर्देश जारी कर सकता है. फिलहाल सभी की नजरें राज्यों के जवाब पर टिकी हैं.
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