Hazaribagh Water Crisis: हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र में स्थित छड़वा डैम इन दिनों पानी की भारी कमी के चलते बड़े संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी की दस्तक के बीच इस बड़े डैम में अब मात्र "17 फीट" पानी ही शेष बचा है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2025 में इस डैम का मुख्य फाटक (गेट) टूट गया था. इस तकनीकी खराबी के कारण पानी के बहाव पर नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया और डैम का कीमती पानी तेजी से बहकर बर्बाद हो गया. हालांकि विभाग ने आनन-फानन में एक गेट की मरम्मत तो कराई, लेकिन तब तक जलस्तर डेंजर जोन तक पहुंच चुका था.
शहर और 3 पंचायतों की प्यास बुझाता है यह डैम
छड़वा डैम हजारीबाग नगर निगम के पूर्ण नियंत्रण में है और यही डैम हजारीबाग शहर के लाखों नागरिकों के अलावा कटकमसांडी प्रखंड की तीन बड़ी पंचायतों, कंचनपुर, गदोखर और रोमी में जलापूर्ति (Water Supply) का एकमात्र मुख्य स्रोत है. डैम में लगातार घटते जलस्तर और फटे हुए फाटकों ने अब नगर निगम प्रशासन की नींद उड़ा दी है. यदि समय रहते पानी के संचयन और लीकेज को रोकने के लिए कोई युद्धस्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हजारीबाग शहर और इन तीनों ग्रामीण पंचायतों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचना बिल्कुल तय है.
सालाना समस्या से आजिज आ चुके हैं स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर सातवें आसमान पर है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मार्च-अप्रैल की गर्मी शुरू होते ही यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन नगर निगम कभी भी इसका कोई परमानेंट (स्थाई) समाधान नहीं निकालता. इस बार टूटे हुए गेटों ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है. इसके अलावा, डैम के लीजधारक पप्पू कुशवाहा को भी पानी बह जाने के कारण लगभग 20 से 25 लाख रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन से बकायदा मुआवजे की गुहार लगाई है.
महापौर का भरोसा, सभी क्षतिग्रस्त गेटों को बदला जाएगा
इस पूरे गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए हजारीबाग नगर निगम के महापौर अरविंद कुमार (राणा) ने मीडिया को बताया कि वे खुद जल्द ही छड़वा डैम का स्थलीय निरीक्षण करेंगे. उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड यह स्वीकार किया है कि डैम के अधिकांश फाटक काफी पुराने और क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिन्हें जल्द ही पूरी तरह से बदलकर नए गेट लगाए जाएंगे. महापौर ने शहरवासियों को आश्वासन दिया है कि पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. अब देखना यह है कि फाइलों से निकलकर यह काम जमीन पर कब तक उतर पाता है.